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    Jain mandir pooja

    10 months ago 343

    मैं आपको बहुत सरल तरीके से “Jain mandir pooja ka basic tariqa” बता देता हूँ, जो ज़्यादातर जगह Digambar–Shwetambar दोनों में मिलती‑जुलती भावना से होता है।

    ---

    1. Mandir में प्रवेश से पहले

    • घर से या बाहर से आते समय
    - साफ कपड़े पहनें (बहुत चमकीले / तंग / फैशन वाले न हों) - मुख साफ रखें, अगर हो सके तो मुँह धोकर या ब्रश करके जाएँ
    • मंदिर के गेट पर
    - जूते‑चप्पल बाहर निकालें - अंदर जाते ही हाथ जोड़कर हल्का सा नमस्कार करें

    ---

    2. प्रवेश के बाद – सबसे पहले क्या करें?

    1. मुख्य वेदी की ओर जाएँ (जहाँ जिनबिंब / भगवान की मूर्ति है)
    2. दूर से ही दोनों हाथ जोड़कर, सिर थोड़ा झुकाकर

    - धीमे से “णमोकार मंत्र” या “णमो अरिहंताणं…” बोलें

    1. अगर व्यवस्था हो तो

    - प्रदक्षिणा (भगवान के चारों ओर दायीं ओर से शांत गति से घूमना) 1, 3 या 7 बार - बीच‑बीच में मन ही मन गुणों का स्मरण करना: “आयुष्मान, वीर्यवान, ज्ञानवान नहीं, बल्कि कषाय रहित, सर्वज्ञ, निरमोह…”

    ---

    3. Dravya Pooja (सामग्री से पूजा) – Ashta‑prakari Pooja का सरल रूप

    (ये ज़्यादातर मूर्ति‑पूजक Shwetambar और Digambar दोनों में किसी न किसी रूप में होती है। क्रम और मंत्र थोड़े बदल सकते हैं, पर भाव एक जैसा रहता है।)

    8 प्रकार की पूजा (Ashta‑prakari):

    1. जल – अभिषेक / स्नान
    2. चन्दन – शीतलता, पवित्रता
    3. पुष्प – सुगंध, सुंदर भाव
    4. धूप – कषायों का दहन, सुगंधित वायु
    5. दीप – ज्ञान का प्रकाश
    6. अक्षत (चावल) – स्थिरता, निश्चय भाव
    7. नैवेद्य – संयम, सीमित भोग
    8. फल – कर्मफल, शुभ परिणाम

    सामान्य विधि (बहुत सरल रूप)

    > ध्यान रहे: जहाँ मन्दिर की मर्यादा जो हो, उसी के अनुसार ही करें। कुछ मंदिरों में केवल पंडित या नियुक्त व्यक्ति ही अभिषेक करते हैं।

    1. जल अभिषेक

    - भगवान पर हल्का जल चढ़ाएँ (अगर अनुमति हो) - मन में: “हे जिनेन्द्र! आप सर्वकषाय रहित हैं, मैं अपने राग‑द्वेष धोने की भावना कर रहा/रही हूँ।”

    1. चन्दन

    - थोड़ा चन्दन लगाएँ (केवल अधिकृत स्थान पर) - भावना: “मेरे मन को भी इतना ही शीतल बना दीजिए – बिना क्रोध, बिना अहंकार।”

    1. पुष्प / माला

    - पुष्प चढ़ाएँ - भावना: “जैसा फूल कोमल है, वैसा ही कोमल हृदय सब जीवों के प्रति बने।”

    1. धूप

    - धूप दिखाएँ या चढ़ाएँ (जहाँ जैसा नियम हो) - भावना: “मेरी कषायें (क्रोध, मान, माया, लोभ) धुएँ की तरह नष्ट हों।”

    1. दीपक

    - दीप जलाकर भगवान के सामने रखें - भावना: “जैसे यह दीप अन्धकार दूर कर रहा है, वैसे ही सम्यक ज्ञान मेरे भीतर अज्ञान दूर करे।”

    1. अक्षत

    - थोड़े चावल अर्पित करें - भावना: “मैं धर्म में स्थिर रहूँ, डगमग न होऊँ।”

    1. नैवेद्य

    - थोड़े मेवे / मिठाई / शक्कर आदि रखें - भावना: “मैं भोग‑विलास में न फँसू, संयम से जीवन जिऊँ।”

    1. फल

    - कोई फल चढ़ाएँ - भावना: “सुख‑दुःख सब मेरे पूर्व कर्मों का फल हैं, मैं सहनशील बनूँ और नए पाप कर्म न बाँधूँ।”

    ---

    4. Bhav Pooja (बिना सामग्री, केवल भाव और मंत्र)

    यदि आप dravya‑pooja न करना चाहें या समय कम हो, तो केवल भाव‑पूजा भी कर सकते हैं:

    • शांत बैठकर 5–10 मिनट Navkar Mantra का जाप
    • कोई छोटा‑सा स्तोत्र / चल्लीसा / पूजन के पद (जैसे “जिनचैत्यवंदन”, “लग्हु शांति पाठ” – जहाँ जो परंपरा हो)
    • 2–3 मिनट चुप बैठकर भगवान के गुणों का ध्यान
    • अंत में “परनindak, क्रोध, कटु वाणी से बचने” की अंदर ही अंदर प्रतिज्ञा

    ---

    5. Aarti / Mangal / Chaitya‑Vandan

    • कुछ मंदिरों में सुबह‑शाम आरती होती है
    • समय पर उपस्थित हों, साथ में
    - हाथ में दीप या केवल हाथ जोड़कर - शांति से आरती / मंगल पद बोलें या सुनें
    • Digambar मंदिरों में बहुधा आरती से ज्यादा शांत स्तुति, स्वाध्याय होता है;
    Shwetambar मूर्तिपूजक मंदिरों में आरती‑मंगल‑दिवो अधिक प्रचलित है

    ---

    6. मंदिर की मुख्य मर्यादा (दोनों परंपराओं में समान भावना)

    • अंदर ज़ोर‑ज़ोर से बात न करें, फोन साइलेंट रखें
    • बच्चों को भी धीरे बोलने के लिए समझाएँ
    • जिनबिंब, वेदी, ग्रन्थ – किसी भी चीज़ को असम्मान से न छुएँ
    • माँस, शराब, तम्बाकू आदि के नशे में या सेवन के बाद मंदिर न जाएँ
    • स्त्रियाँ मासिक धर्म के समय अधिकांश परंपराओं में
    - dravya‑pooja / जिनबिंब स्पर्श / गर्भगृह प्रवेश से बचती हैं - लेकिन Navkar, stavan, dhyan, prarthana सब कर सकती हैं (घर पर या बाहर शांत बैठकर)

    इस विषय पर जैन नॉलेज पर सुन्दर लेख भी है – “Why to do pooja”

    ---

    सार

    • Jain mandir की असली पूजा = शांत मन + विनम्रता + भगवान के गुणों का स्मरण
    • Dravya (जल, चन्दन, पुष्प…) केवल सहारा हैं, असली पूजा भाव की है
    • Digambar हो या Shwetambar – बाहरी रीति थोड़ा बदले, पर लक्ष्य एक ही है:
    कषाय कम करना, सम्यक दर्शन‑ज्ञान‑चारित्र की ओर बढ़ना.
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