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    Jain mandir pooja

    9 months ago 277

    मैं आपको बहुत सरल तरीके से “Jain mandir pooja ka basic tariqa” बता देता हूँ, जो ज़्यादातर जगह Digambar–Shwetambar दोनों में मिलती‑जुलती भावना से होता है।

    ---

    1. Mandir में प्रवेश से पहले

    • घर से या बाहर से आते समय
    - साफ कपड़े पहनें (बहुत चमकीले / तंग / फैशन वाले न हों) - मुख साफ रखें, अगर हो सके तो मुँह धोकर या ब्रश करके जाएँ
    • मंदिर के गेट पर
    - जूते‑चप्पल बाहर निकालें - अंदर जाते ही हाथ जोड़कर हल्का सा नमस्कार करें

    ---

    2. प्रवेश के बाद – सबसे पहले क्या करें?

    1. मुख्य वेदी की ओर जाएँ (जहाँ जिनबिंब / भगवान की मूर्ति है)
    2. दूर से ही दोनों हाथ जोड़कर, सिर थोड़ा झुकाकर

    - धीमे से “णमोकार मंत्र” या “णमो अरिहंताणं…” बोलें

    1. अगर व्यवस्था हो तो

    - प्रदक्षिणा (भगवान के चारों ओर दायीं ओर से शांत गति से घूमना) 1, 3 या 7 बार - बीच‑बीच में मन ही मन गुणों का स्मरण करना: “आयुष्मान, वीर्यवान, ज्ञानवान नहीं, बल्कि कषाय रहित, सर्वज्ञ, निरमोह…”

    ---

    3. Dravya Pooja (सामग्री से पूजा) – Ashta‑prakari Pooja का सरल रूप

    (ये ज़्यादातर मूर्ति‑पूजक Shwetambar और Digambar दोनों में किसी न किसी रूप में होती है। क्रम और मंत्र थोड़े बदल सकते हैं, पर भाव एक जैसा रहता है।)

    8 प्रकार की पूजा (Ashta‑prakari):

    1. जल – अभिषेक / स्नान
    2. चन्दन – शीतलता, पवित्रता
    3. पुष्प – सुगंध, सुंदर भाव
    4. धूप – कषायों का दहन, सुगंधित वायु
    5. दीप – ज्ञान का प्रकाश
    6. अक्षत (चावल) – स्थिरता, निश्चय भाव
    7. नैवेद्य – संयम, सीमित भोग
    8. फल – कर्मफल, शुभ परिणाम

    सामान्य विधि (बहुत सरल रूप)

    > ध्यान रहे: जहाँ मन्दिर की मर्यादा जो हो, उसी के अनुसार ही करें। कुछ मंदिरों में केवल पंडित या नियुक्त व्यक्ति ही अभिषेक करते हैं।

    1. जल अभिषेक

    - भगवान पर हल्का जल चढ़ाएँ (अगर अनुमति हो) - मन में: “हे जिनेन्द्र! आप सर्वकषाय रहित हैं, मैं अपने राग‑द्वेष धोने की भावना कर रहा/रही हूँ।”

    1. चन्दन

    - थोड़ा चन्दन लगाएँ (केवल अधिकृत स्थान पर) - भावना: “मेरे मन को भी इतना ही शीतल बना दीजिए – बिना क्रोध, बिना अहंकार।”

    1. पुष्प / माला

    - पुष्प चढ़ाएँ - भावना: “जैसा फूल कोमल है, वैसा ही कोमल हृदय सब जीवों के प्रति बने।”

    1. धूप

    - धूप दिखाएँ या चढ़ाएँ (जहाँ जैसा नियम हो) - भावना: “मेरी कषायें (क्रोध, मान, माया, लोभ) धुएँ की तरह नष्ट हों।”

    1. दीपक

    - दीप जलाकर भगवान के सामने रखें - भावना: “जैसे यह दीप अन्धकार दूर कर रहा है, वैसे ही सम्यक ज्ञान मेरे भीतर अज्ञान दूर करे।”

    1. अक्षत

    - थोड़े चावल अर्पित करें - भावना: “मैं धर्म में स्थिर रहूँ, डगमग न होऊँ।”

    1. नैवेद्य

    - थोड़े मेवे / मिठाई / शक्कर आदि रखें - भावना: “मैं भोग‑विलास में न फँसू, संयम से जीवन जिऊँ।”

    1. फल

    - कोई फल चढ़ाएँ - भावना: “सुख‑दुःख सब मेरे पूर्व कर्मों का फल हैं, मैं सहनशील बनूँ और नए पाप कर्म न बाँधूँ।”

    ---

    4. Bhav Pooja (बिना सामग्री, केवल भाव और मंत्र)

    यदि आप dravya‑pooja न करना चाहें या समय कम हो, तो केवल भाव‑पूजा भी कर सकते हैं:

    • शांत बैठकर 5–10 मिनट Navkar Mantra का जाप
    • कोई छोटा‑सा स्तोत्र / चल्लीसा / पूजन के पद (जैसे “जिनचैत्यवंदन”, “लग्हु शांति पाठ” – जहाँ जो परंपरा हो)
    • 2–3 मिनट चुप बैठकर भगवान के गुणों का ध्यान
    • अंत में “परनindak, क्रोध, कटु वाणी से बचने” की अंदर ही अंदर प्रतिज्ञा

    ---

    5. Aarti / Mangal / Chaitya‑Vandan

    • कुछ मंदिरों में सुबह‑शाम आरती होती है
    • समय पर उपस्थित हों, साथ में
    - हाथ में दीप या केवल हाथ जोड़कर - शांति से आरती / मंगल पद बोलें या सुनें
    • Digambar मंदिरों में बहुधा आरती से ज्यादा शांत स्तुति, स्वाध्याय होता है;
    Shwetambar मूर्तिपूजक मंदिरों में आरती‑मंगल‑दिवो अधिक प्रचलित है

    ---

    6. मंदिर की मुख्य मर्यादा (दोनों परंपराओं में समान भावना)

    • अंदर ज़ोर‑ज़ोर से बात न करें, फोन साइलेंट रखें
    • बच्चों को भी धीरे बोलने के लिए समझाएँ
    • जिनबिंब, वेदी, ग्रन्थ – किसी भी चीज़ को असम्मान से न छुएँ
    • माँस, शराब, तम्बाकू आदि के नशे में या सेवन के बाद मंदिर न जाएँ
    • स्त्रियाँ मासिक धर्म के समय अधिकांश परंपराओं में
    - dravya‑pooja / जिनबिंब स्पर्श / गर्भगृह प्रवेश से बचती हैं - लेकिन Navkar, stavan, dhyan, prarthana सब कर सकती हैं (घर पर या बाहर शांत बैठकर)

    इस विषय पर जैन नॉलेज पर सुन्दर लेख भी है – “Why to do pooja”

    ---

    सार

    • Jain mandir की असली पूजा = शांत मन + विनम्रता + भगवान के गुणों का स्मरण
    • Dravya (जल, चन्दन, पुष्प…) केवल सहारा हैं, असली पूजा भाव की है
    • Digambar हो या Shwetambar – बाहरी रीति थोड़ा बदले, पर लक्ष्य एक ही है:
    कषाय कम करना, सम्यक दर्शन‑ज्ञान‑चारित्र की ओर बढ़ना.
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