Raju haran ki Dandi aur faliye ka pariman Kitna angul hai
“राजोहरण की डंडी और फालिये का कितने अंगुल परिमाण हो” – इसका कोई एक सर्वमान्य (सबके लिए एक जैसा) नियम आगम या सब संप्रदायों में समान रूप से निर्धारित नहीं मिलता।
आम तौर पर स्थिति यह है:
- डंडी (हैंडल) और
- फालियूँ / फालियो (ऊनी भाग / झाड़ू वाला भाग)
का आकार गच्छ–संगh की अपनी–अपनी मर्यादा से तय होता है – जैसे किसी जगह 18 अंगुल, कहीं 20–24 अंगुल, कहीं थोड़ी अलग लम्बाई रखी जाती है।
इसलिए:
- शास्त्रों में जहाँ राजोहरण का वर्णन है, वहाँ उसका उद्देश्य अधिक बताया गया है –
- सूक्ष्म जीवों की रक्षा - अहिंसा और सजगता का प्रतीक न कि लम्बाई–चौड़ाई के सटीक अंगुल।
- सही और व्यावहारिक उत्तर आपके लिए वही होगा, जो
- आपके गुरुदेव / आचार्य भगवंत, - या आपके स्थानीय गच्छ / संघ की लिखित मर्यादा के अनुसार हो। वहीं पर डंडी और फालिये की सही अंगुल माप बताई जाती है (यदि मर्यादा में निर्धारित हो)।
- “अंगुल” भी हर परम्परा में औसत उँगली की चौड़ाई से नापा जाता है, इसलिए उसका वास्तविक सेण्टीमीटर–इंच में माप भी थोड़ा बदल सकता है।
इसलिए, मैं किसी निश्चित संख्या (जैसे 18 या 24 अंगुल) बताकर आपको भ्रमित नहीं करना चाहता। आप अपने गुरुदेव या मर्यादा–पुस्तक से पूछेंगे तो आपको आपके गच्छ के अनुसार बिल्कुल सही माप मिल जाएगा – वही मानना उचित और धर्मानुकूल है।