tat samay ki yogyata
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“Tat samay ki yogyata” अपने आप में अधूरा वाक्य है, इसलिए सही उत्तर देने के लिए संदर्भ ज़रूरी है।
कृपया थोड़ा और स्पष्ट करें कि आप किस बारे में पूछ रहे हैं:
- किसका “tat samay ki yogyata”?
जैन दर्शन में “yogyata” प्रायः दो तरह से समझी जाती है:
- आध्यात्मिक योग्यता (भाव की पात्रता)
- सही सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र - कषायों (क्रोध, मान, माया, लोभ) की शिथिलता - संयम ग्रहण करने की तैयारी आदि
- काल के अनुसार योग्यता (समय की पात्रता)
- जैसे: केवल पंचम काल तक ही मोक्ष सम्भव होना (दुगम्बर मत) - वर्तमान समय में तीर्थंकर न होना आदि
आप किस विशेष “tat samay ki yogyata” के बारे में जानना चाहते हैं, यह बताइए, तभी मैं स्पष्ट और सरल जैन-दृष्टि से उत्तर दे सकता हूँ।