Devsur samachari manyta
“देवसुर समाचारी मान्यता” यह शब्द मुख्यतः श्वेताम्बर मूर्तिपूजक तपागच्छ परम्परा से जुड़ा है।
सरल भाषा में:
- “देवसुर” – तपागच्छ की एक पुरानी परम्परा / पहचान है, जो आचार्य विजयदेवसूरि आदि की परम्परा से जुड़ी मानी जाती है।
- “समाचारी” – सही आचरण, सही रीति–नीति, विशेषकर तिथि‑पालन और पर्व‑उत्सव की मर्यादा।
देवसुर समाचारी मान्यता का मूल अर्थ
- चन्द्र कैलेंडर की तिथियाँ कभी‑कभी “छूट” जाती हैं (तिथि‑लोप)।
- प्राचीन आचार्यों ने जो नियम निश्चित किए थे, जैसे ऐसी स्थिति में १३वीं तिथि को मानना आदि, उन्हीं नियमों के अनुसार पर्वों, प्रतिष्टा, गुरुभक्ति‑तिथियाँ आदि मनाना – इसे ही देवसुर समाचारी कहा जाता है।
- जो भी संघ/समाज इन प्राचीन तिथि‑नियमों और मर्यादाओं को मानकर चलता है, वह अपने को “देवसुर समाचारी” कहता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से
- सार यही है कि
यह विषय संप्रदाय‑विशेष की परम्परा से जुड़ा तकनीकी विषय है, लेकिन धर्म का मूल संदेश वही रहता है – अहिंसा, संयम, सत्य और आचार्यों की मर्यादा का पालन।