तङ्ग्रायिङ्ग्रङ्ग शामशिव तङ्ग्रायिङ्ग्राय गङ्गमाय
आपने जो पंक्ति लिखी है – “तङ्ग्रायिङ्ग्रङ्ग शामशिव तङ्ग्रायिङ्ग्राय गङ्गमाय” – यह किसी प्रसिद्ध या प्रमाणित जैन सूत्र / स्तोत्र की भाषा या रचना से मेल नहीं खाती। संभव है कि:
- यह गलत टाइप हो गया हो
- उच्चारण सुनकर लिखी गई हो और असली संस्कृत/प्राकृत/मराठी/हिंदी शब्द बिगड़ गए हों
- या यह जैन परंपरा का नहीं, किसी और परंपरा का वाक्य हो
जैन आगमों, प्रसिद्ध मन्त्रों और स्तोत्रों (जैसे नवकार मंत्र, उवसग्गहरं, जैन चालीसा, भक्ति स्तव आदि) में ऐसा पाठ नहीं मिलता।
अगर आप किसी जैन मन्त्र / स्तोत्र के बारे में जानना चाहते हैं (जैसे नवकार मंत्र, उवसग्गहरं स्तोत्र, लॉगसुत्तम्, भक्तामर स्तोत्र आदि), तो उसका सही पाठ लिखें या उसका नाम बताकर अर्थ जानना चाहें तो मैं शुद्ध परंपरागत अर्थ समझा सकता हूँ।