क्षायिक सम्यग्दर्शन कौन से गुणस्थान में मिलता है ?
क्षायिक सम्यग्दर्शन सातवें गुणस्थान (अपूर्वकरण गुणस्थान) में मिलता है।
संक्षेप में क्रम ऐसे है:
- 4th गुणस्थान – औपशमिक / औपशमिक‑क्षायोपशमिक सम्यग्दर्शन
- 5th गुणस्थान – देशना‑प्राणता, यहाँ भी सम्यग्दर्शन स्थिर होता है
- 7th गुणस्थान – अपूर्वकरण = क्षायिक सम्यग्दर्शन (कषाय का वास्तविक क्षय प्रारंभ, अतः सम्यक्त्व भी क्षायिक हो जाता है)
यह सिद्धांत दिगम्बर और श्वेताम्बर – दोनों परंपराओं में समान रूप से मान्य है।