देशविरत का क्या अर्थ है ?
“देशविरत” का अर्थ बहुत सरल है:
- “देश” = कुछ हिस्सा / आंशिक
- “विरत” = विरक्ति / व्रत लेना / त्याग करना
देशविरत वह श्रावक (गृहस्थ) है, जो पापों या असंयम से पूरी तरह नहीं, लेकिन आंशिक रूप से विरक्ति (त्याग) रखता है।
जैसे –
- पूर्ण ब्रह्मचर्य नहीं, पर कुछ मर्यादाएँ रखता है
- पूर्ण अपरिग्रह नहीं, पर कुछ सीमा रखता है
- सब तरह का हिंसा-त्याग नहीं, पर बहुत-सी हिंसा से बचता है
अर्थात् वह व्यक्ति धीरे‑धीरे त्याग के मार्ग पर है, पूरा साधु नहीं, पर केवल सर्वथा असंयमी भी नहीं – बीच की अवस्था: आंशिक संयम / आंशिक विरति को ही “देशविरत” कहते हैं।