पाँचवे गुणस्थान के व्यक्ति की गति क्या होती है ?
पाँचवें गुणस्थान को “देशव्रती श्रावक गुणस्थान” (देसविरत श्रावक) कहते हैं।
ऐसे जीव की अगली गति केवल दो ही हो सकती है:
- मनुष्य गति (मानव जन्म)
- देव गति (देव लोक)
नरक गति और तिर्यंच गति (पशु‑पक्षी, कीट आदि) – इन दोनों में पाँचवें गुणस्थान वाले सम्यग्दृष्टि जीव का उद्गमन नहीं होता।
दिगंबर और श्वेतांबर – दोनों परंपराओं में मूल सिद्धांत यही है कि सम्यग्दर्शन वाले देशव्रती श्रावक की भविष्य गति देव या मनुष्य ही होती है।