पाँचवें गुणस्थान का व्यक्ति 12 वे देवलोक जाता है क्या ?
हाँ, पाँचवें गुणस्थान (देशव्रती सम्यग्दृष्टि – श्रावक की अवस्था) से जीव अगले जन्म में १२वें देवलोक तक जा सकता है।
संक्षेप में बातें:
- पाँचवाँ गुणस्थान मनुष्य या संज्ञी पंचेन्द्रिय तिर्यंच में ही होता है।
- यदि ऐसा जीव सम्यक् श्रद्धा रखकर, श्रावकाचार (बारह व्रत, प्रतिमाएँ आदि) अच्छी तरह से करता हो और बहुत उत्तम पुण्य (विशेषकर देवायुष्य का) बन्ध कर ले,
यह बात गुणस्थान-वर्णन करते हुए स्पष्ट रूप से आती है कि ऐसा सम्यग्दृष्टि-श्रावक “जघन्य पहले देवलोक में, उत्कृष्ट बारहवें देवलोक में” उत्पन्न हो सकता है – यह पाँचवें गुणस्थान वाले आराधक जीव के लिए कहा गया है। ( jainqq.org)
ध्यान रहे:
- “ज़रूर १२वें ही में जाएगा” ऐसा नियम नहीं; कौन से देवलोक में जाएगा यह उसके
- दिगंबर–श्वेतांबर, दोनों परम्पराओं में यह सिद्धान्त समान ही माना जाता है कि उच्च देवलोकों का जन्म उच्च पुण्य और सम्यक्त्व की आराधना पर निर्भर है; व्याख्याओं की छोटी-छोटी शब्दान्तर की भिन्नताएँ हो सकती हैं, पर मूल सिद्धान्त एक ही है।