पाँचवें गुणस्थान में मर कर व्यक्ति क्या अगले जनम में मोक्ष पा सकता है ?
संक्षेप उत्तर: केवल पाँचवें गुणस्थान (देशविरत / संयतासंयत) में मर जाने से यह नहीं कहा जा सकता कि जीव जरूर अगले ही जन्म में मोक्ष पा लेगा।
थोड़ा विस्तार से:
- मोक्ष कब होता है?
- मोक्ष उसी जन्म में होता है जिसमें जीव - पहले केवलज्ञान (13वें–14वें गुणस्थान) तक पहुँचे, - फिर देह छोड़ते ही सिद्ध बन जाता है। - अर्थात् “अगला जन्म = सीधा सिद्ध” जैसी कोई व्यवस्था नहीं होती; बीच में अन्तिम मानवी जन्म में बहुत ऊँचे गुणस्थानों तक जाना अनिवार्य है।
- पाँचवें गुणस्थान की स्थिति
- 5वाँ गुणस्थान = देशविरत / संयतासंयत – कुछ व्रत का पालन, कुछ असंयम शेष। - यहाँ अभी भी चारित्र-मोह (राग-द्वेष) काफ़ी मात्रा में रहता है। - ऐसे जीव की मृत्यु के बाद वह अगले जन्म में - मनुष्य, देव, या तिर्यंच आदि किसी भी गति में जा सकता है (नियम उसके पूर्व बंधे कर्मों पर निर्भर हैं), - पर केवल पाँचवाँ गुणस्थान होना इस बात की गारंटी नहीं है कि अगला जन्म ही मोक्ष वाला अन्तिम जन्म होगा।
- अगले जन्म में मोक्ष के लिए क्या ज़रूरी है? (सिद्धांत रूप से)
- पहले से ही विशेष पुण्य‑कर्म (जैसे तीर्थंकर/उच्च मानव जन्म देने वाले नाम‑कर्म आदि) बंधे हों, - अगला जन्म मानव हो, उचित देश‑काल (उदाहरण: भरत क्षेत्र) में हो, - उस जन्म में जीव कम से कम 7वें से 12वें गुणस्थान तक प्रगति कर केवलज्ञान प्राप्त करे, - और उसी जन्म के अंत में मोक्ष हो।
इसलिए निष्कर्ष: सिर्फ़ पाँचवें गुणस्थान में मरने भर से “अगले ही जन्म में मोक्ष” निश्चित नहीं होता। यह तो जीव के पूर्व और वर्तमान दोनों प्रकार के कर्म‑बंधन और आगे की साधना पर निर्भर है।