Chandaliya jain kuldevi
चंदलिया जैन कुलदेवी के बारे में कोई एक “अधिकृत” या सर्वमान्य नाम जैन शास्त्रों में निर्धारित नहीं है।
कुलदेवी / कुलदेवता
- जैन धर्म में मुख्य आराध्य तो तीर्थंकर भगवान, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु‑संत (पञ्चपरमेष्ठी) माने गए हैं।
- “कुलदेवी” या “कुलदेवता” की परंपरा अधिकतर परिवार / जाति / गोत्र की लोक‑परंपरा से आती है, शास्त्रों में अलग से आदेशित नहीं है।
- इसलिए एक ही गोत्र या सरनेम वाले सब लोगों की कुलदेवी हमेशा एक ही हो, यह ज़रूरी नहीं है। अलग‑अलग परिवारों की परंपरा भिन्न हो सकती है।
चंदलिया (या चंदालिया) जैनों के बीच –
- कुछ परिवार किसी यक्षी‑देवी जैसे पद्मावती, चक्रेश्वरी आदि को आराध्य मानते हैं।
- कुछ केवल जिनमंदिर में जिनेंद्र भगवान की ही पूजा करते हैं और अलग से कुलदेवी पर ज़ोर नहीं देते।
आपके लिए सही जानकारी कैसे मिलेगी?
- सबसे पहले अपने दादा‑दादी, नाना‑नानी, माता‑पिता या परिवार के बड़े बुज़ुर्गों से पूछें –
- “हमारे घर/वंश की कुलदेवी किसे माना जाता है?” - “पहले कहाँ‑कहाँ चढ़ावा या मान्यता रखते थे?”
- अपने परिवारिक जैन मंदिर या जिनालय के पुजारी / ज्ञानी श्रावक से भी पूछ सकते हैं कि चंदलिया परिवारों की क्या स्थानीय परंपरा रही है।
धार्मिक दृष्टि से ध्यान रखने योग्य बात
- जो भी कुलदेवी / कुलदेवता की आराधना हो, उसे जिनेंद्र भगवान से नीचे और सहयोगी / उपकारी देव मानकर ही किया जाता है।
- मोक्ष‑मार्ग, सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र – ये सब केवल तीर्थंकरों व सिद्धों से ही सिद्ध होते हैं; देव‑देवी केवल उपकारी माने जाते हैं।
इसलिए, चंदलिया जैनों की कुलदेवी का नाम आपको अपने परिवार की परंपरा से ही निश्चित रूप से पता चलेगा; शास्त्रों में इस गोत्र के लिए कोई एक नाम तय नहीं किया गया है।