Raat mei kyun nahi khana
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जैन धर्म के अनुसार रात में भोजन नहीं करना चाहिए। इसका मुख्य कारण अहिंसा का पालन है। रात में अंधेरा होने के कारण भोजन में सूक्ष्म जीव (जैसे बैक्टीरिया, छोटे कीट आदि) अधिक होते हैं, जिन्हें हम देख नहीं पाते और अनजाने में उन्हें खा लेते हैं। इससे जीव हिंसा होती है, जो जैन धर्म के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।
इसके अलावा, रात में भोजन करने से पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अतः जैन आचार्य और श्रावक-साधु सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करते और सभी को यही पालन करने की सलाह देते हैं।