Samayik mai rati arati kisne ki??
समयिक (Samayik) जैन धर्म में एक विशेष तप है जिसमें साधक समता भाव में स्थित होकर आत्मचिंतन करता है। समयिक के दौरान रात्रि आरती (रति आरती) का विधान नहीं है। समयिक के नियमों के अनुसार, समयिक करते समय साधक केवल आत्मस्वाध्याय, प्रार्थना, और ध्यान करता है। उस समय अन्य कोई धार्मिक क्रियाएँ जैसे पूजा, आरती, भक्ति गीत आदि नहीं की जातीं।
इसलिए, "समयिक में रति आरती किसने की?"—का उत्तर यह है कि समयिक के दौरान कोई भी रति आरती नहीं करता, और न ही करनी चाहिए। समयिक के नियमों के अनुसार साधक को पूर्ण एकाग्रता और समता भाव में रहना चाहिए।
यदि आपको समयिक से संबंधित और जानकारी चाहिए तो कृपया बताइये।