GANDHAR KON HOTE HAI
“Gandhar” (या “गणधर / गणाधर”) जैन धर्म में किसे कहते हैं – इसका आसान उत्तर:
गणधर कौन होते हैं?
- प्रत्येक तीर्थंकर के मुख्य शिष्य को गणधर कहा जाता है।
- “गण” = साधुओं का समूह,
उनकी मुख्य पहचान
- तीर्थंकर जब केवलज्ञान (केवल‑ज्ञान) प्राप्त करके समवसरण में देशना देते हैं, तब वह दिव्य‑ध्वनि (Divya‑dhvani) साधारण जीव सीधी समझ नहीं सकते।
- इन दिव्य‑ध्वनि को पूरा‑का‑पूरा समझने और फिर
- इन्हीं गणधरों ने आगे चलकर आगम (जैन शास्त्र) का रूप दिया, इसलिए उन्हें श्रुत‑केवली भी कहा जाता है।
उदाहरण
- भगवान महावीर स्वामी के ११ गणधर थे, जिनमें मुख्य गणधर थे – गौतम स्वामी (इंद्रभूति गौतम)।
- कुल २४ तीर्थंकरों के युग में मिले‑जुले १४० गणधर माने जाते हैं।
दिगम्बर और श्वेताम्बर दोनों परम्पराएँ
- दोनों मानते हैं कि तीर्थंकरों के ऐसे मुख्य शिष्य होते हैं, जिन्हें गणधर कहा जाता है।
- भगवान महावीर के ११ गणधरों की संख्या पर दोनों एकमत हैं; कुछ नामों की उच्चारण / स्पेलिंग में थोड़ा भेद मिल सकता है, पर मूल सिद्धांत समान है।
संक्षेप में: गणधर = वे परम विद्वान और अत्यन्त ऊँचे आध्यात्मिक स्तर वाले मुनि, जो तीर्थंकर की दिव्य‑देशना को सही रूप में समझकर, उसे शास्त्र और उपदेश के रूप में दुनिया तक पहुँचाते हैं।