Anitya bhawna kise kehte hai
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अनित्य भावना (Anitya Bhawna) जैन धर्म की बारह भावनाओं (बारह भावना) में से एक है। "अनित्य" का अर्थ है "अस्थायी" या "नश्वर"। अनित्य भावना का तात्पर्य इस विचार से है कि संसार की सभी वस्तुएँ, प्राणी, संबंध, शरीर, धन आदि सब अस्थायी हैं और एक न एक दिन नष्ट हो जाएंगे।
जैन धर्म में अनित्य भावना का महत्व:
- यह भावना व्यक्ति को संसार की वस्तुओं, संबंधों एवं सुख-दुख के प्रति आसक्ति (attachment) से बचने में सहायता करती है।
- इससे आत्मा की शाश्वतता (eternity of soul) और संसार की अस्थिरता (impermanence of worldly things) का बोध होता है।
- यह भावना साधक को वैराग्य (detachment) की ओर प्रेरित करती है, जिससे मोक्ष मार्ग में आगे बढ़ना संभव होता है।
अनित्य भावना का अभ्यास कैसे करें? प्रतिदिन साधक को चिंतन करना चाहिए कि:
- मेरा शरीर, धन, परिवार आदि सब नश्वर हैं।
- यह सब एक दिन छूट जाएगा।
- केवल आत्मा शाश्वत है; बाकी सब परिवर्तनशील है।
उदाहरण: "आज जो सुख-सुविधा, संबंध, शरीर आदि प्राप्त हैं, वे सदा बने नहीं रह सकते। किसी भी क्षण यह सब समाप्त हो सकता है, इसलिए इनके प्रति मोह नहीं रखना चाहिए।"
इस प्रकार, अनित्य भावना संसार से वैराग्य और आत्मकल्याण की भावना जागृत करने के लिए जैन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है।