Padmavati mata mantra
Here is a simple and commonly used Padmavati Mata mantra in Jain tradition:
1) बीज (seed) मंत्र “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सिद्ध्यै नमः॥” Om Hrim Shrim Klim Aim Hrim Shrim Klim Siddhyai Namah॥
सरल अर्थ (meaning):
- ॐ – शुभ, पवित्र, साधना की शुरुआत का चिन्ह।
- ह्रीं, श्रीं, क्लीं, ऐं – बीजाक्षर, जिनसे पद्मावती माता की करुणा, शक्ति, शुभता और धर्म की ओर आकर्षण का स्मरण होता है।
- सिद्ध्यै – आध्यात्मिक सिद्धि, रुकावटों का शांत होना, अंदर की कषायों (क्रोध, मान, माया, लोभ) में शांति।
- नमः – नमस्कार, विनम्र भाव से वंदन करता हूँ।
2) छोटा, आसान मंत्र (दैनिक जाप के लिए) “ॐ ह्रीं श्री पद्मावती मातायै नमः॥” Om Hrim Shri Padmavati Mataye Namah॥
कैसे जपें (Japa method, Jain way):
- पहले नवकार मंत्र बोलें।
- शुद्ध भाव से, बिना हिंसा, बिना लोभ–लालच की भावना के जप करें।
- 9, 27 या 108 बार शांत मन से, बैठकर जप करें।
- भाव रखें कि – “हे पद्मावती माता, मेरे अंदर की कषायें कम हों, सम्यक दर्शन–ज्ञान–चारित्र में दृढ़ता मिले।”
परम्परा (Digambar / Shwetambar):
- दोनों परम्पराओं में पद्मावती माता को भगवान पार्श्वनाथ की यक्षिणी / शासनदेवी माना जाता है।
- मंत्र के शब्द और स्वरूप में थोड़ा अंतर हो सकता है, पर मुख्य उद्देश्य – रक्षा, बाधा-निवारण और आध्यात्मिक प्रगति – समान रहता है।
- यदि आप किसी विशेष गच्छ/संप्रदाय से हैं, तो वही मंत्र अपनाएँ जो आपके गुरु या आपके मंदिर में बताया जाता है।
पदमावती देवी के मंत्र और स्तोत्र पर विस्तार से आप यहाँ पढ़ सकते हैं