Anumodana kesi kre or kisi nahi example deke samjhao
अनुमोदना मतलब – किसी के अच्छे या बुरे काम को मन से “हाँ ठीक है” कहना, खुशी मनाना या समर्थन देना।
जैन दर्शन में कर्म बँधने के तीन कारण बताए गए हैं –
- कर्ता – खुद करके
- कारिता – किसी से करवाकर
- अनुमोदना – किसी और को करता देखकर, भीतर से खुशी / समर्थन करके
तीनों से कर्म बँधता है।
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1. अच्छी (पुण्य) अनुमोदना कैसे करें?
जब कोई धर्म या सद्गुण का काम करे, और हम दिल से खुशी मनाएँ, प्रशंसा करें – यह पुण्य अनुमोदना है।
सही अनुमोदना के उदाहरण
- कोई तप कर रहा है (उपवास, एकासन, आयम्बिल)
- आप कहें: “आपका तप बहुत सुंदर है, खूब खूब अनुमोदना।” - मन में भी उनके त्याग, नियम से सच्ची खुशी हो।
- कोई बच्चा जीव-दया कर रहा है
- जैसे: घायल पक्षी को दाना-पानी देना, दवा करवाना। - आप कहें: “बहुत अच्छा काम किया, ऐसे ही दया करते रहो, मेरी अनुमोदना है।”
- कोई व्यक्ति झूठ न बोलकर नुकसान सह लेता है
- उसने सत्य को नहीं छोड़ा, चाहे थोड़ा घाटा हो गया। - आप कहें: “आपने बहुत सही किया, सत्य नहीं छोड़ा, यह सच्चा धर्म है, मेरी अनुमोदना।”
- कोई जैन शास्त्र पढ़ता/पढ़ाती है, प्रवचन सुनता है
- आप मन में सोचें और ज़ुबान से बोलें: “आपका धर्मप्रवृत्ति की ओर रुझान देखकर बहुत आनंद आया, मैं आपकी अनुमोदना करता/करती हूँ।”
- कोई त्याग करता है (नशा छोड़ना, मांस छोड़ना, रात में न खाना आदि)
- “आपने यह त्याग लिया, इससे बहुत पुण्य का बंध होगा, मेरी अनुमोदना।”
ऐसी अनुमोदना से खुद भी पुण्य बंधता है, भले हमने खुद वह तप या दान न किया हो।
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2. गलत (पाप) अनुमोदना क्या होती है?
जब कोई पाप का काम करे और हम
- खुश हों,
- ताली बजाएँ,
- मन में “ठीक ही तो किया” कहें,
गलत अनुमोदना के उदाहरण (ऐसा न करें)
- किसी को मारना, चोट पहुँचाना
- दो लोग झगड़ रहे हैं, एक ने दूसरे को मारा - आप मन में सोचें: “सही किया, इसको तो ऐसा ही करना चाहिए था।” → यह हिंसा की अनुमोदना, गंभीर पाप।
- शिकार, मांस, अंडे आदि को बढ़ावा देना
- कोई कहे: “कल हम फिश पकाने वाले हैं, बहुत मज़ा आएगा।” - आप कहें: “वाह, बहुत बढ़िया, बुलाना मुझे भी।” → आप भी उस हिंसा में सहभागी (अनुमोदक) बन जाते हैं।
- धोखा, मिलावट, काला धन की तारीफ
- कोई कहे: “मैंने थोड़ा मिलावट कर ली, खूब फायदा हुआ।” - आप हँसकर बोलें: “बहुत दिमाग लगाया, समझदार हो तुम!” → यह बेईमानी की अनुमोदना = पाप का बंध।
- गाली-गलौच, चरित्र-हनन की हौसला-अफज़ाई
- कोई दूसरों की निंदा कर रहा है, गंदी भाषा बोल रहा है। - आप बोलें: “बहुत अच्छा सुनाया, मज़ा आ गया!” → यह निंदा और कठोर वाणी की अनुमोदना, पाप।
- नशा, गलत संगति, व्यसनों की प्रशंसा
- कोई शराब, सिगरेट, जुआ, गलत संबंध में फँसा है, और आप कहें: “जीवन तो मज़े के लिए है, सही कर रहे हो।” → यह सब पाप की अनुमोदना है।
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3. कब चुप रहना चाहिए / अनुमोदना न करें
अगर सामने वाला स्पष्ट रूप से गलत काम कर रहा है और:
- आप मना कर सकते हैं → तो धीरे से समझाएँ
- अगर वह नहीं मानता, या स्थिति ऐसी है कि आप बोल नहीं सकते,
कभी-कभी हम सोचते हैं – “मैंने तो कुछ किया नहीं, बस साथ खड़ा था / सुन रहा था।” पर अगर मन से “वाह, सही किया” आया, तो वह भी अनुमोदना से पाप है।
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4. सरल सूत्र याद रखो
- धर्म, दया, सत्य, तप, त्याग, शील →
खुलकर, हृदय से अनुमोदना करो → पुण्य बंध।
- हिंसा, झूठ, चोरी, कुचरित, अधिक मोह, नशा, धोखा →
न करना, न करवाना, न अनुमोदना करना → पाप से बचाव।
- जहाँ निश्चित न हो कि काम सही है या गलत, वहाँ
- जल्दी-जल्दी “वाह वाह” न करो, - विचार कर के ही अनुमोदना करो।
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अनुमोदना बहुत शक्तिशाली साधना है – हम खुद न भी कर पाएँ, फिर भी किसी के अच्छे धर्मकार्य की सच्चे मन से अनुमोदना करके बहुत पुण्य कमा सकते हैं, और बुरे काम की अनुमोदना से बचकर पाप से दूर रह सकते हैं।