कृष्ण लेसिया पर कविताएं
जैन दर्शन में कृष्ण लेश्या सबसे अशुभ / काली लेश्या मानी गई है – जिसमें क्रूरता, घोर राग‑द्वेष, हिंसक मानसिकता और अत्यधिक स्वार्थ होता है। नीचे कृष्ण लेश्या पर कुछ सरल कविताएँ दे रहा हूँ, जिन्हें आप प्रवचन, बाल सभा या पाठ में प्रयोग कर सकते हैं।
---
1. चेतावनी – कृष्ण लेश्या
कृष्ण लेश्या काली छाया, घोर अँधेरा मन के भीतर जहाँ करुणा का दीप न जलता, जलता केवल द्वेष का इन्दर
राग बढ़े तो क्रोध भड़कता, हिंसा बनती खेल यहाँ पर‑पीड़ा में सुख जो पाए, वही कृष्ण रंग लेश्या वहाँ
लोभ लदे जब मन के पंखों पर, धर्म रहे फिर कैसे खड़ा बारम्बार जिनवाणी कहती – “ऐसे भावों से मत जुड़ा”
जो जीवों को तुच्छ समझे, स्वार्थ सिवा न कुछ भी जाने कृष्ण लेश्या के ऐसे बीज, आगे नरक के द्वार ही खोलें
---
2. रूपांतरण – कृष्ण से शुक्ल की ओर
मन में जब उठता है विचार – “केवल मैं, बस मेरा हक” तब कृष्ण लेश्या घेर लेती, बन कर कालिख, घना धुंधक
क्रूर वचन, कटु नेत्र, जलन, ईर्ष्या का जब हो विस्तार समझो मन में काली लेश्या, कर रही पथ से हमें पार
पर यदि क्षमा का फूल खिले, और दया का झरना बहे अपने‑पराए भाव मिटा कर, सबको अपना जी मन कहे
तो कृष्ण से नील, नील से कपोत, फिर पद्म और पांडुर रंग धीर‑धीरे शुक्ल लेश्या बन कर, उजला कर दे जीवन‑अंग
---
3. बालकों के लिए – छोटी कविता
कृष्ण लेश्या काला रंग है, झगड़ा‑झंझट जिसकी ढाल झूठ, चुगली, मार‑कूट में, लगता जिसको बहुत कमाल
हम बच्चों को सीख है लेनी – ऐसा रंग न छूना है हँस कर बोलें, सत्य रहें हम, करुणा का दीपक होना है
जब मन में गुस्सा आए तो, धीमी साँस भर, गिनती कर “दस, नौ, आठ…” मन को समझा – “मैं जिनवाणी का हूँ घर”
जो न हिंसा का खेल रचाता, न किसी का दिल दुखाता वह कृष्ण से दूर निकल कर, शुभ लेश्या को पास बुलाता
---
4. अंतर्मन की प्रार्थना
हे जिनवर! मुझमें भी अभी, कृष्ण लेश्या के बीज हैं कभी कटु वाणी, कभी अभिमान, कभी भीतर तीखे तीज हैं
आप बताओ, कैसे चुनूँ मैं, शुभ‑अशुभ के बीच का मार्ग कैसे तोड़ूँ भीतर की यह, कड़वाहट का कठोर कगार
दो शक्ति ऐसी कि मैं पहचानूँ, उठते ही अशुभ विचार उसी क्षण “मिच्छामी दुक्कड़ं” कह, कर लूँ अंतर से स्वीकार
मन की खेती शुद्ध बनाकर, दया‑क्षमा के बीज बोऊँ कृष्ण लेश्या की काली मिट्टी, शुक्ल सुगंध में आज ढोऊँ
---
यदि आप चाहें तो मैं कृष्ण लेश्या पर और भी छोटी‑छोटी बाल कविताएँ या स्वाध्याय के लिए प्रश्न‑उत्तर भी बना सकता हूँ, ताकि विषय और स्पष्ट हो सके।