Bhomiya Ji mantra
Bhomiya ji का नाम कुछ जैन तीर्थों (खासकर राजस्थान क्षेत्र) में “क्षेत्रपाल देव” के रूप में लिया जाता है, लेकिन:
- जैन आगमों / मूल जैन शास्त्रों में
- जो “भोमिया जी की आरती / चालीसा / मंत्र” प्रचलित हैं, वे अधिकतर लोक-भक्ति (फोक / क्षेत्रीय) परंपरा से हैं, जैन शास्त्र आधारित नहीं।
जैन धर्म की दृष्टि से क्या करें?
- मुख्य और सर्वोच्च मंत्र – णमोकार (नवकार) मंत्र है।
यदि आप किसी भी देव–देवी या क्षेत्रपाल के प्रति श्रद्धा रखते हैं, तो भी मूल साधना नवकार मंत्र ही मानी जाती है।
- आप भक्ति इस तरह कर सकते हैं:
- पहले शांत मन से णमोकार मंत्र का जप करें। - फिर सरल अपने शब्दों में प्रार्थना कर सकते हैं, जैसे: “हे क्षेत्रपाल देव, मेरी आत्मा में सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र की वृद्धि हो, मुझे अहिंसा, सत्य और संयम के मार्ग पर दृढ़ रखें।”
- अगर आपके आसपास कोई विशेष “भोमिया जी मंत्र” बोला जाता है,
तो समझिए कि वह स्थानीय लोक-परंपरा है, न कि जैन आगम में निर्दिष्ट शास्त्रीय मंत्र।
Bhomiya ji से जुड़ा एक प्रश्न जैन दृष्टि से यहाँ चर्चा हुआ है (भक्ति से अधिक संयम, सदाचार और व्यवहारिक जीवन पर ज़ोर दिया गया है): आप चाहें तो उसे पढ़ सकते हैं
संक्षेप में – जैन धर्म में शास्त्रीय रूप से स्वीकृत मंत्र = णमोकार मंत्र आदि, क्षेत्रीय “भोमिया जी मंत्र” = लोक-भक्ति, जो शास्त्र से बंधी हुई नहीं है।