अनुमोदना पर कविताएं
जैन धर्म में अनुमोदना का अर्थ है – किसी और के शुभ काम, पूजन, दान, तप, स्वाध्याय आदि को देखकर हृदय से प्रसन्न होना और उनका उत्साह बढ़ाना।
नीचे अनुमोदना पर कुछ सरल कविताएँ हैं, जिन्हें आप पाठशाला, भाषण या कार्ड आदि में उपयोग कर सकते हैं।
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१. “कुब् कुब् अनुमोदना”
जो भी पुण्य करे जग में, हम मन ही मन हर्षाएँ, “कुब् कुब् अनुमोदना” कहकर, शुभ भावों से नहलाएँ।
कोई तप करे, कोई दान करे, कोई जप-ध्यान लगाता, उसकी ओर नज़र उठे जब भी, मन से फूल चढ़ाता।
ईर्ष्या-द्वेष भुलाकर अपने, हृदय को स्वच्छ बनाएँ, दूसरों की साधना देखकर, जैसे अपना पुण्य बढ़ाएँ।
जहाँ-जहाँ भी शुभ कर्म दिखें, वहाँ-वहाँ हर्ष मनाएँ, जैनधर्म की इस मर्यादा की, कुब् कुब् अनुमोदना गाएँ।
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२. “दूसरों का पुण्य, मेरा भी बन जाए”
जब कोई मंदिर जाता है, दीपक बाती लाता है, आरती गाकर प्रभु के आगे, शीश झुकाकर आता है।
मैं भी दूर खड़ा-खड़ा मन ही मन मुस्काता हूँ, “वाह! कितना सुंदर भाव है”, ऐसे ही दोहराता हूँ।
उसकी पूजा, उसका तप, मैं कैसे कर पाऊँ शायद, पर उसकी मंज़िल की खुशी में, मैं भी साथ चल पाऊँ निज।
दूसरों की साधना में जब, हर्षित हो मुस्काता हूँ, जैसे उसका पुण्य-प्रवाह, मुझ तक भी आ पाता है।
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३. “अनुमोदना का फूल”
एक बगीचा था सद्गुणों का, जहाँ पुण्य के फूल खिले, कोई सेवा, कोई दान-धर्म, कोई वचन से मीठे मिले।
हर फूल को तो तोड़ न पाऊँ, न हर माला गूँथ पाऊँ, पर हर फूल की खुशबू पाकर, मन से शीश झुका पाऊँ।
जब भी कोई सुगंध बिखेरे, अच्छा कर्म दिखा जाए, हँसकर, दिल से, स्नेह भरे स्वर में, “अनुमोदना” कहलाए।
यही फूल है अनुमोदना का, सबसे न्यारा, सबसे प्यारा, दूसरों के शुभ कर्मों से, भर देता है जीवन सारा।
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४. “ईर्ष्या नहीं, अनुमोदना”
पड़ोसी ने आज तप किया, मित्र ने दान की थाली दी, किसी ने ग़रीब को भोजन, किसी ने शिक्षा प्यारी दी।
सोचूँ अगर – “इनको ही मौका, मुझे नहीं कुछ करने को”… तो ईर्ष्या की आग जला दे, मन को भी और तन को।
पर जैनों का सच्चा मार्ग है, अनुपम, पवित्र, सुहाना, दूसरों के पुण्य कर्म पर, करना है अनुमोदना।
“बहुत अच्छा किया तुमने”, इतना भी जो कह पाएँ, अपने भी भीतर संस्कारों के, नए बीज हम बो जाएँ।
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आप इन्हें अपनी आवश्यकता के अनुसार छोटा–बड़ा कर सकते हैं, या बच्चों के लिए कुछ पंक्तियाँ चुनकर याद करा सकते हैं।
अनुमोदना का अर्थ और प्रयोग के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए आप यहाँ पढ़ सकते हैं: