अनुमोदना पर बच्चों की क्लास कैसे केवी
अनुमोदना पर बच्चों की क्लास बहुत आसान और प्यारी तरह से ली जा सकती है। आप लगभग 45–60 मिनट की क्लास इस तरह रखें:
---
1. शुरुआत – माहौल बनाइए (5 मिनट)
- सबको “जय जिनेन्द्र” बुलवाइए।
- 1–2 मिनट शांति से आँखें बंद करवा कर बोलें:
---
2. सरल भाषा में अर्थ समझाएँ (10 मिनट)
बच्चों की भाषा में बहुत सरल समझाइए:- अनुमोदना क्या है?
- ज़ोर दीजिए:
अगर चाहें तो बता सकते हैं: “जितनी सच्ची खुशी से हम दूसरों के पुण्य में शामिल होते हैं, उतना ही हमारा भी पुण्य बढ़ता है।”
आप अनुमोदना के बारे में और भी पढ़ना चाहें तो यहाँ देख सकते हैं
---
3. छोटी कहानी / उदाहरण (10–15 मिनट)
एक बहुत सरल कहानी सुनाएँ, जैसे:
- दो बच्चे हैं – आरव और दिया।
- आरव रोज़ स्वाध्याय करता है, पूजा करता है।
- दिया पहले सोचती है – “ये तो बस दिखावा है।”
- फिर गुरुजी बताते हैं – “अगर तुम सच में उसके अच्छे काम पर खुश होगी, तो तुम्हारा भी पुण्य बनेगा – इसे अनुमोदना कहते हैं।”
- अगली बार जब आरव पूजा करता है, दिया दिल से कहती है –
- दोनों का मन साफ़ होता है, प्यार बढ़ता है, ईर्ष्या घटती है – यही अनुमोदना की शक्ति है।
बच्चों से पूछें:
- “कहानी में किसने अनुमोदना की?”
- “जब दिया ने अनुमोदना की, तो उसके अंदर क्या बदलाव आया?”
---
4. चर्चा – बच्चों से बातें (10 मिनट)
कुछ आसान प्रश्न पूछें, जिससे वे खुद सोचें:
- तुम्हारे घर में कौन-कौन से अच्छे काम होते हैं?
(जैसे: मम्मी पापड़-मोह की सावधानी रखती हैं, पापा किसी की मदद करते हैं, भाई/बहन पाठ पढ़ते हैं…)
- तुम कैसे अनुमोदना कर सकते हो?
- “पापा, आपने जो दान दिया, वो बहुत अच्छा काम है, मुझे गर्व है।” - “दीदी, तुम रोज़ पाठ करती हो, मैं तुम्हारी अनुमोदना करता/करती हूँ।”
बच्चों से 1–1 वाक्य बुलवाइए, जैसे:
- “मैं मम्मी की अहिंसा की अनुमोदना करता हूँ।”
- “मैं अपने दोस्त की सच बोलने की अनुमोदना करती हूँ।”
---
5. छोटा खेल / एक्टिविटी (10–15 मिनट)
(क) रोल-प्ले (नाटक जैसा खेल)
3–4 बच्चों के छोटे-छोटे ग्रुप बनाइए:- ग्रुप 1 – एक बच्चा पूजा कर रहा है, दूसरा उसकी अनुमोदना कर रहा है।
- ग्रुप 2 – एक बच्चा किसी की मदद कर रहा है, दूसरा अनुमोदना कर रहा है।
- ग्रुप 3 – एक बच्चा झूठ नहीं बोलता, दोस्त उसकी अनुमोदना कर रहे हैं।
हर ग्रुप 1–2 मिनट का छोटा सीन दिखाए। बाक़ी बच्चे देख कर बोलें – “यहाँ किसने अनुमोदना की?”
(ख) “ईर्ष्या या अनुमोदना?” खेल
आप एक-एक वाक्य बोलें:- “मेरे दोस्त को पुरस्कार मिला, मैं जल गया – बोला: तू ही बड़ा आ गया है।”
- “मेरे दोस्त को पुरस्कार मिला, मैंने कहा: बहुत अच्छा, मुझे बहुत खुशी हुई।”
बच्चों से पूछें – यह ईर्ष्या थी या अनुमोदना? वे हाथ उठा कर जवाब दें – मज़ेदार भी रहेगा और सीख भी पक्की होगी।
---
6. वास्तविक जीवन का छोटा होमवर्क (2–3 मिनट)
बच्चों को सरल सा संकल्प दिलवाएँ:
- “आज से मैं रोज़ कम से कम एक इंसान के अच्छे काम की अनुमोदना करूँगा / करूँगी।”
- “मुझे जो भी घर में, स्कूल में, या मंदिर में अच्छा काम दिखेगा, मैं मन ही मन कहूँगा – कुब कुब अनुमोदना।”
आप चाहें तो बोलवा सकते हैं:
> “हे जिनेन्द्र भगवान! > मुझे ऐसा बनाना कि > मैं दूसरों के अच्छे काम देखकर > हमेशा खुश होऊँ और सच्ची अनुमोदना करूँ।”
---
7. अंत – पुनरावृत्ति (5 मिनट)
अंत में 2–3 बच्चों से कहलवाएँ:
- “आज मैंने क्या सीखा?”
- “अनुमोदना मतलब – दूसरे के अच्छे काम पर दिल से खुश होना।”
- “अनुमोदना करने से ईर्ष्या कम होती है और पुण्य बढ़ता है।”
फिर सब मिलकर बोलें: “कुब कुब अनुमोदना” और क्लास समाप्त करें।
---
इस तरह क्लास बहुत सरल, रोचक और पूरी तरह जैन सिद्धांत पर आधारित रहेगी, और बच्चे अनुमोदना को समझ कर रोज़मर्रा में अपना भी सकेंगे।