Samvasran ki 12 sabha m kon bethta h
जैन धर्म के अनुसार, समवसरण (Samavasaran) वह दिव्य सभा है, जहाँ केवलज्ञान प्राप्त तीर्थंकर भगवान उपदेश देते हैं। समवसरण में 12 प्रकार की सभाएँ (12 सभाएँ/सर्कल) मानी जाती हैं, और इनमें विभिन्न जीवधारी विशिष्ट क्रम में बैठते हैं। समवसरण की 12 सभाओं में बैठने वाले इस प्रकार हैं:
- पहली सभा – तीर्थंकर भगवान (मध्य में)
- दूसरी सभा – गणधर (तीर्थंकर के मुख्य शिष्य)
- तीसरी सभा – अन्य साधु (मुनि)
- चौथी सभा – आर्यिकाएँ (साध्वी)
- पाँचवी सभा – श्रावक (जैन गृहस्थ पुरुष)
- छठी सभा – श्राविकाएँ (जैन गृहस्थ महिलाएँ)
- सातवीं सभा – देवगण (देवता)
- आठवीं सभा – देवियाँ (देवी)
- नौवीं सभा – मनुष्य (अन्य मनुष्यजन, जिनमें राजा-रानी, विद्वान आदि)
- दसवीं सभा – तिर्यंच (पशु-पक्षी आदि)
- ग्यारहवीं सभा – नरक से आए जीव
- बारहवीं सभा – अन्य समस्त जीव (जो ऊपर की श्रेणियों में नहीं आते)
इन 12 सभाओं में सभी जीवों को तीर्थंकर भगवान का उपदेश सुनने का समान अधिकार होता है, और सभी जीव अपनी-अपनी भाषा में भगवान का उपदेश समझ सकते हैं।
यह समवसरण की 12 सभा व्यवस्था का संक्षिप्त विवरण है।