Jai neminath jai girnar,
“Jai Neminath, Jai Girnar” = नमो भगवान नेमिनाथ! नमो पावन गिरनार!
यह वाक्य भगवान नेमिनाथ और उनके मोक्षस्थल गिरnar पर्वत की स्तुति में बोला जाता है। इसका सरल भावार्थ:
- हम प्रभु नेमिनाथ की जय बोलते हैं, जो बारवें तीर्थंकर हैं।
- हम पावन तीर्थ गिरnar पर्वत को नमन् करते हैं, जहाँ से प्रभु नेमो को केवलज्ञान मिला और अंत में वहीं से मोक्ष प्राप्त हुआ (परम सिद्ध पद)।
यह पंक्ति कई स्तवनों और भजनों की शुरुआत में आती है, और नेमिनाथ प्रभु के प्रति श्रद्धा, विनय और भक्ति का सुंदर भाव प्रकट करती है।