Harim Shabd ka kya Arth Hota Hai
195
“Harim” या “Hrīm / Hreem / Harīm” एक बीज (Seed) अक्षर / मंत्र है। जैन परम्परा में यह अपने‑आप में कोई बड़ा वाक्य नहीं, बल्कि कई मंत्रों का भाग के रूप में आता है, जैसे – “ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं नमः”, “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं… ” आदि।
इसका साधारण अर्थ (जैन संदर्भ में):
- यह पवित्र, शुभ और आध्यात्मिक शक्ति का संकेत देने वाला अक्षर माना जाता है।
- मन को भीतर की ओर, आत्मा की ओर लगने में सहायता करने वाला ध्वन्यात्मक (sound) बीज है।
- जब इसे जैन मंत्रों के साथ बोला जाता है, तो इसका भाव होता है –
ध्यान रहे:
- जैन आगमों में मुख्य और सर्वमान्य मंत्र णमोकार (नवकार) मंत्र है; “ह्रीं/हरिम” जैसे बीजाक्षर बाद की मंत्र‑परम्पराओं में अधिक दिखते हैं।
- इनका उपयोग भी केवल आध्यात्मिक उन्नति, शुद्धि और साधना के भाव से ही करना चाहिए, सांसारिक लालसाओं के लिए नहीं।
यदि आप “ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं नमः” जैसे किसी विशेष मंत्र का पूरा अर्थ जानना चाहें तो वह भी अलग से समझाया जा सकता है। पढ़ने के लिए आप यह पेज देख सकते हैं Om Hrim Shrim Arham Namah