Raat ko Sone se pehle ki prathana
रात को सोने से पहले की बहुत सरल जैन प्रार्थना (घरेलू उपयोग के लिए):
आप चाहे जिस परंपरा के हों (दिगम्बर / श्वेताम्बर), नीचे दी गई बातें सबके लिए ठीक हैं।
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1. दिन का शांत भाव से पुनरावलोकन
बिस्तर पर बैठकर या शांत खड़े होकर 1–2 मिनट:
- आज मैंने किससे कड़वी बात की?
- किसको मन, वचन, काय से चोट पहुँची?
- कौन‑कौन से असत्य, क्रोध, लोभ, राग‑द्वेष हुए?
फिर मन ही मन कहना:
“जो भी भूलें आज मुझसे हुई हैं, मैं सब जीवों से क्षमा माँगता/माँगती हूँ।”
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2. नवकार मंत्र
कम से कम 3 बार श्रद्धा से बोलें:
प्राकृत मूल–पाठ `णमो अरिहंताणं` `णमो सिद्धाणं` `णमो आयरियाणं` `णमो उवज्झायाणं` `णमो लोए सभ्व्व साहूणं ॥`
सरल अर्थ
- मैं अरिहंतों को नमस्कार करता/करती हूँ।
- मैं सिद्धों को नमस्कार करता/करती हूँ।
- मैं आचार्यों को नमस्कार करता/करती हूँ।
- मैं उपाध्यायों को नमस्कार करता/करती हूँ।
- मैं संसार के सभी साधु‑साध्वियों को नमस्कार करता/करती हूँ।
इन पाँचों को नमस्कार करने से सब पाप क्षय होते हैं – ऐसी भावना रखें।
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3. क्षमापना (सब जीवों से क्षमा माँगना)
यह बहुत प्रसिद्ध जैन क्षमापना है, रात को कहना उत्तम है:
प्राकृत `खामेमि सव्वजीवे, सव्वे जीवा खमंतु मे।` `मित्ति मे सव्वभूएसु, वेरं मज्झं न केणइ ॥`
सरल अर्थ
- मैं सब जीवों को क्षमा करता/करती हूँ,
- मेरा सब प्राणियों से मैत्रीभाव रहे,
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4. अंत में छोटी प्रार्थना (भय दूर करने व सद्बुद्धि के लिए)
इसे भी रोज़ रात को बोल सकते हैं:
हिंदी प्रार्थना “हे अरिहंत परमात्मा, आपने जो सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र का मार्ग बताया है, मुझे भी वही सच्चा मार्ग चलने की शक्ति दीजिए।
आज के दिन में जो भी पाप, गलतियाँ, जान‑अनजाने मन, वचन, और शरीर से हुई हों, उनके लिए मैं हृदय से पश्चाताप करता/करती हूँ।
सब जीवों से मैं क्षमा माँगता/माँगती हूँ, और सबको क्षमा करता/करती हूँ। मुझे अहिंसा, संयम और शुद्ध आत्मा की ओर बढ़ने की प्रेरणा दीजिए।”
फिर अंत में एक बार “मिच्छामि दुक्कडम्” बोलें (अर्थ: जो भी आपसे दुःख हुआ हो, उसके लिए मैं क्षमा चाहता/चाहती हूँ).
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5. यदि समय हो तो
- थोड़ी देर कायोत्सर्ग (शरीर को स्थिर रखकर “मैं आत्मा हूँ, शरीर नहीं” की भावना)
- या 5–10 बार शांत मन से नवकार मंत्र जप कर के सोएँ।
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इस तरह की छोटी‑सी, रोज़ की रात की प्रार्थना से:
- दिनभर के पापों का प्रायश्चित्त होता है,
- मन हल्का और शांत होकर सोता है,
- और धीरे‑धीरे सम्यक भाव बढ़ते हैं।