What is the difference between kapana and Ichchha?
संक्षेप में:
- कोई भी साधारण “चाह” या “wish”
- यह अच्छी भी हो सकती है, बुरी भी – जैसे
- ज्ञान की इच्छा, समाधि की इच्छा (शुभ)
- भोग‑विलास की इच्छा (अशुभ)
- सामान्य, हल्की या मध्यम स्तर की चाह
- कामना / कामना (आपने शायद “kapana” लिखना चाहा है)
- किसी विशेष वस्तु / सुख को लेकर
ज़्यादा मजबूत, चिपकने वाली चाह
- प्रायः
स्वार्थ, इन्द्रिय‑सुख, लोभ से जुड़ी होती है
- जैसे – धन की कामना, मान‑सम्मान की कामना, शरीर‑सुख की कामना
- यही कामना आगे चलकर
राग‑द्वेष और कर्म‑बंधन का बड़ा कारण बनती है
जैन दृष्टि से
- दोनों ही मन के भाव हैं, लेकिन
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इच्छा – तटस्थ शब्द है; अगर यह धर्म, संयम, मोक्ष के लिए है तो “शुभ इच्छा” मानी जाती है।
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कामना – सामान्यतः
निष्काम / विरक्त जीवन के विरुद्ध मानी जाती है; सम्यग्दर्शन की शुद्धि में बाधक बताई गई है (जैसे लोक‑परलोक, धन, यश आदि की कामना न रखना आदर्श माना गया है)।
आदर्श Jain स्थिति यह है कि
- अशुभ इच्छाएँ और कामनाएँ त्याग दी जाएँ,
- केवल मोक्ष, सम्यग्दर्शन, वीतरागता की शुभ इच्छा रहे,
- और धीरे‑धीरे वह भी शुद्ध होकर इच्छा‑निरोध (इच्छाओं का पूर्ण शांत हो जाना) की अवस्था तक पहुँचे।