Surana ki Kuldevi
Surana (ओसवाल सुराना) समाज में परंपरानुसार जो सबसे प्रसिद्ध कुलदेवी मानी जाती हैं, वह हैं:
श्री सुसवाणी माताजी (Suswani Mataji)
- इन्हें विशेष रूप से सुराना, दुगड़ (डूगर), संखला आदि ओसवाल गोत्रों की कुलदेवी के रूप में माना जाता है।
- इनका मुख्य स्थान प्राचीन मंदिर मोर्खाना (जि. बीकानेर, राजस्थान) में माना जाता है।
साथ‑साथ, व्यापक ओसवाल समाज के लिए ऐतिहासिक रूप से श्री साचीया माताजी (Sachiya Mataji, ओसियां) को भी कुलदेवी‑रूप में मानने की परंपरा है; कई सुराना परिवार दोनों स्थानों का सम्मान करते हैं।
लेकिन शुद्ध जैन दृष्टि से याद रखें:
- हमारा मुख्य आश्रय अrihant, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु भगवंत हैं।
- कुलदेवी/देव‑देवी को अधिकतर शासन‑रक्षक / पारिवारिक परंपरा के रूप में सम्मान दिया जाता है, न कि मोक्ष‑दाता के रूप में।
- पूजा हमेशा अहिंसा, संयम और सम्यक् दर्शन के अनुसार होनी चाहिए।
महत्वपूर्ण बात हर सुराना परिवार की परंपरा एक जैसी नहीं होती। कुछ सिर्फ सुसवाणी माताजी, कुछ साचीया माताजी, और कुछ दोनों या किसी अन्य शासन‑देवी को मानते हैं। आपके घर की सही कुलदेवी जानने का सबसे अच्छा तरीका है:
- अपने घर के बुजुर्गों से पूछना,
- वंशावली / विवाहपत्र / परिवारिक रजिस्टर देखना,
- अपने मूल गाँव / शहर के जैन मंदिर या समाज के रिकॉर्ड देखना।
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