Stavan in Jainism in Hindi
जैन धर्म में “स्तवन” का मतलब है – भगवान की स्तुति (प्रशंसा) में गाए जाने वाले भक्ति‑गीत या पद।
1. स्तवन क्या है?
जैन परंपरा में स्तवन वह भक्ति‑गीत है, जो हम- तीर्थंकरों
- अरिहंत‑सिद्ध
- आचार्य, उपाध्याय, साधु‑साध्वी
इनका उद्देश्य होता है:
- भगवान के गुणों को याद करना
- अपने मन में श्रद्धा, नम्रता और वैराग्य बढ़ाना
- आत्मा की शुद्धि के लिए भाव जागृत करना
2. स्तवन और मंत्र / स्तोत्र में अंतर
बहुत लोग सबको “भजन” कह देते हैं, पर पारंपरिक रूप से –- मंत्र – छोटे, बहुत गूढ़ वाक्य, जैसे नवकार मंत्र।
- स्तोत्र – संस्कृत/प्राकृत में रचित श्लोक‑रूप प्रार्थना, जैसे भक्तामर स्तोत्र, ऊवसग्गहरं स्तोत्र आदि।
- स्तवन – साधारण भाषा (हिंदी, गुजराती आदि) में गाए जाने वाले भक्ति‑गीत, जैसे
3. स्तवन के मुख्य प्रकार (सीधे‑सादे शब्दों में)
- तीर्थंकर स्तवन – किसी एक या सभी 24 तीर्थंकरों की महिमा
- वित्राग / नवकार‑भावना वाले स्तवन – जैसे सम्यक दर्शन, अहिंसा, क्षमा आदि पर
- वैराग्य‑भावना स्तवन – संसार से उब करके मोक्ष की इच्छा जगाने वाले
- आचार्य / साधु‑साध्वी महिमा स्तवन
- तीर्थ‑देव के स्तवन – जैसे संखेश्वर पार्श्वनाथ, शंखेश्वर दादा आदि के स्तवन
4. दिगम्बर और श्वेताम्बर परंपरा
- दोनों परंपराओं में स्तवन गाने की भावना एक जैसी है –
- अंतर मुख्यतः भाषा, रचनाकार और धुनों में होता है, न कि भाव में।
- श्वेताम्बर परंपरा में प्राकृत‑संस्कृत के साथ‑साथ गुजराती‑हिंदी स्तवन बहुत प्रचलित हैं।
- दिगम्बर परंपरा में संस्कृत/प्राकृत के स्तोत्रों के पाठ के साथ हिंदी/कन्नड़ आदि के भक्ति‑गीत अधिक मिलते हैं।
5. स्तवन गाने का सही भाव
जैन धर्म के अनुसार स्तवन गाते समय –- भगवान को ईश्वर‑निर्माता न मानकर
- “हे प्रभु! आप जैसे बनना है” – ऐसी आत्म‑उत्थान की भावना रखें
- केवल सुर‑ताल या मनोरंजन नहीं,
6. कुछ प्रसिद्ध जैन स्तवन (हिंदी/मिश्रित) के उदाहरण
(केवल नाम दे रहे हैं, पूरा पाठ अलग से भी लिया जा सकता है)- “हे प्रभु! तुम बिन कौन सहारा”
- “समकित की विद्या सिखाओ प्रभु”
- “मेरी भावना, मेरी आत्मा मेरी भावना”
- “जय जय वीतराग वर्दन”
- “जय जिनेंद्र, प्रभु जिनेंद्र” आदि
इनमें से कई स्तवन और उनके अर्थ आप जैननॉलेज की स्तवन‑श्रेणी में देख सकते हैं
अगर आप चाहें तो मैं किसी एक खास स्तवन का पूरा पाठ और सरल अर्थ (हिंदी में) भी दे सकता हूँ – जैसे “हे प्रभु तुम बिन कौन सहारा” या “मेरी भावना” आदि।