Jain manglacharan geet Sundar Awaaz
“मंगलाचारण गीत” मतलब कोई भी ऐसा Jain bhajan / shlok जो शुरुआत में शुभता (मंगल) के लिए गाया जाए — जैसे पूजा, पाठ, प्रवचन या पढ़ाई शुरू करने से पहले। आप सुरीली, साफ और “भाव” वाली आवाज में इन्हें गाएँ, वही सबसे सुंदर आवाज मानी जाती है।
नीचे दो बहुत प्रचलित जैन मंगलाचारण हैं:
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1. “मंगलं भगवान् वीरः…” (बहुत प्रसिद्ध मंगलाचारण)
देवनागरी:
मंगलं भगवान् वीरः । मंगलं गौतमो गुरुः । मंगलं कुन्दकुन्दाद्यो । जैनधर्मोस्तु मंगलम् ॥
उच्चारण (रोमन):
Mangalaṃ Bhagavān Vīraḥ Mangalaṃ Gautamo Guruḥ Mangalaṃ Kundakundādyo Jaina‑dharmostu Maṅgalam ॥
सरल अर्थ: भगवान महावीर मंगलमय हैं, गुरु गौतम स्वामी मंगलमय हैं, आचार्य कुन्दकुन्द आदि सभी महान आचार्य मंगलमय हैं, संपूर्ण जैन धर्म ही मंगलमय है।
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2. पंच परमेष्ठी मंगलाचारण
(ये “मंगल देवो / तिर्थंकर मंगल” जैसा ही भाव है)देवनागरी (एक साधारण रूप):
अरिहन्ताणं मंगल कारणं । सिद्धाणं मंगल कारणं । आचारियाणं मंगल कारणं । उवज्जायाणं मंगल कारणं । सव्वसाधूणं मंगल कारणं ॥
एसं पंच नमोकारं । सव्वपावप्पणासणं । मंगलाणं च सव्वेसिं । पढमं हवई मंगलं ॥
सरल अर्थ: अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और सभी साधु–साध्वियाँ — इन सबका स्मरण और वंदन ही सच्चा मंगल है। इन पाँच का नमस्कार (णमोकार मंत्र) सभी पापों का नाश करने वाला है और सब मंगलों में सबसे पहला व सबसे उत्तम मंगल है।
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Sundar Awaaz में कैसे गाएँ?
- बहुत तेज़ नहीं, शांत और धीमी गति में गाएँ।
- हर शब्द साफ बोलें (विशेष कर “अरिहन्ताणं, सिद्धाणं…” में)।
- पहले 3–4 बार पढ़कर उच्चारण सही कर लें, फिर धुन लगाएँ।
- अकेले अभ्यास के बाद, मंदिर या घर पर परिवार के साथ समूह में गाएँ — समूह में भक्ति अपने‑आप सुंदर लगती है।
इन जैसे मंगलाचारण और उनका अर्थ सरल भाषा में आप यहाँ भी देख सकते हैं
आप चाहें तो मैं इन्हीं पंक्तियों का और भी सरल “बच्चों के लिए” रूप या छोटी धुन सुझाकर लिख सकता हूँ (बिना राग के, सीधा बोल जैसा)।