किस काव्य को आचार्य श्री ने ग्रामीण भाषा की संज्ञा दी है?* पदों के लालित्य रहित काव्य रीति की रमणीयता रहित काव्य रस के प्रवाह रहित काव्य उपरोक्त सभी
आचार्य श्री ने जिस काव्य में
- रीति की रमणीयता न हो,
- पदों का लालित्य न हो,
- रस का प्रवाह न हो,
ऐसे अनगढ़ काव्य को ग्रामीण भाषा के समान कहा है।
इसलिए सही उत्तर है: उपरोक्त सभी ✅