जिनके परिणाम हमेशा कठोर रहते हैं तथा जिनके हृदय में समझे जाने पर जिनवाणी रूप जल का प्रवेश नहीं होता ऐसे श्रोता किसके समान है?* हंस पाषाण सर्प बिलाव
ऐसे श्रोता “पाषाण” (पत्थर) के समान होते हैं।
अर्थ: जैसे पत्थर पर पानी डाला जाए तो उसमें समा नहीं पाता, उसी तरह जिनके परिणाम हमेशा कठोर हों, उनमें जिनवाणी रूपी जल (उपदेश) हृदय में प्रवेश नहीं कर पाता।