संसार रुपी बेल की जड़ कौन है? * सम्यकत्व आरंभ मिथ्यात्व परिग्रह
संसार रूपी बेल की जड़ है – मिथ्यात्व
अर्थात:
जब तक मिथ्यात्व (गलत दृष्टि / असम्म्यक दृष्टि) है, तब तक संसार रूपी बेल बढ़ती रहती है।
सम्यकत्व (सम्यक दर्शन) आने पर ही इस बेल की जड़ कटती है और मोक्ष का मार्ग खुलता है।