ग्रंथ के नाम कहने को कौनसा उपक्रम कहते हैं?* आनुपूर्वी अर्थाधिकार नाम प्रमाण
ग्रंथ के नाम कहने को “नाम उपक्रम” कहते हैं।
यानी जब किसी शास्त्र या ग्रंथ का नाम बोला/लिखा जाता है, तो वह नाम‑उपक्रम के अंतर्गत आता है, न कि आनुपूर्वी, अर्थाधिकार या प्रमाण के।