Sak k hai samyasagar ji
आचार्य समयसागर जी कौन हैं – संक्षेप में
- आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज दिगंबर जैन परंपरा के आचार्य हैं।
- वे आचार्य विद्यासागर जी महाराज के
मुख्य बातें (परंपरागत रूप से बताई जाती हैं):
- 2 मई 1975 को आपने ब्रह्मचर्य-व्रत लिया।
- उसी वर्ष (1975) में दतिया–सोनागिरि क्षेत्र में क्षुल्लक दीक्षा ली।
- 31 अक्टूबर 1978 को ऐलक दीक्षा हुई।
- 8 मार्च 1980 को मध्य प्रदेश के सिद्धक्षेत्र द्रोणगिरि में मुनि दीक्षा ली – दीक्षा गुरु आचार्य विद्यासागर जी महाराज।
- आप बहुत कठोर तप, साधना, अध्ययन और नियमों के पालन के लिए प्रसिद्ध हैं।
आचार्य पद (उत्तराधिकारी):
- आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने स्वास्थ्य कारणों से 6 फरवरी 2024 को स्वयं आचार्य पद का त्याग कर समयसागर जी को उत्तराधिकारी घोषित किया।
- बाद में कुंडलपुर (जिला दमोह, म.प्र.) में समयसागर जी ने औपचारिक रूप से आचार्य पद स्वीकार किया।
यानी “समयसागर जी” आज के समय में आचार्य विद्यासागर जी की ही परंपरा के प्रमुख दिगंबर आचार्य हैं, जो उनके मार्गदर्शन को आगे बढ़ा रहे हैं।
आचार्य विद्यासागर जी और उनकी परंपरा के बारे में थोड़ा और पढ़ना हो तो यहाँ देख सकते हैं: