Om hrim shrim arham shri adinathay namah ye mantra shudh hai kya
हाँ, यह मंत्र जैन दृष्टि से शुद्ध और साध्य माना जा सकता है, बस उच्चारण/लेखन में थोड़ी सी सुधार की बात है।
आपने लिखा है: “Om hrim shrim arham shri adinathay namah”
संस्कृत व्याकरण के हिसाब से इसे ऐसे लिखना/जपना और अधिक शुद्ध माना जाता है:
> ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं श्री आदिनाथाय नमः > Om Hrim Shrim Arham Shri Adinathāya Namah
छोटा‑सा अंतर सिर्फ “Adinathay” की जगह “Ādināthāya” (आदिनाथाय) है – यही सही रूप है।
मंत्र के प्रत्येक शब्द का भाव
- ॐ – पंच परमेष्ठी (अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु) का संक्षिप्त रूप, अत्यंत पवित्र ध्वनि।
- ह्रीं (Hrim) – बीज मंत्र; आत्मिक पवित्रता व दिव्य ऊर्जा का संकेत।
- श्रीं (Shrim) – शुभता, मंगल, आध्यात्मिक समृद्धि का संकेत।
- अर्हं (Arham) – जो कषायों पर विजय पा चुका हो; अरिहंत की अवस्था का सूचक पवित्र जैन शब्द।
- श्री आदिनाथाय (Shri Adināthāya) – प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) को नमस्कार।
- नमः (Namah) – मैं वंदन/नमस्कार करता हूँ।
यह मंत्र शास्त्रों में कहाँ?
- यह आगम का मूल सूत्र नहीं है, बल्कि जैन मंत्र साधना परंपरा में प्रचलित एक संयोजन है।
- इसी प्रकार का एक मंत्र –
इसलिए भावना, अर्थ और उद्देश्य से आपका मंत्र जैन धर्मानुसार सही, शुद्ध और साधक है। आप चाहें तो इसे ऊपर बताए शुद्ध रूप में नियमित जप सकते हैं।
इस मंत्र के बारे में और पढ़ने के लिए आप यहाँ देख सकते हैं: “Om Hrim Shrim Arham Namah”