Shree manibhadra veer stuti
Here is the popular Shree Manibhadra Veer Stuti (Gujarati text) and its simple meaning:
Text (Gujarati)
धारेलुं सहु काम सिद्ध करवा, छो देव साचा तमे, ने विघ्नो सघळां विनाश करवा, छो शक्तिशाली तमे;
सेवे जे चरणो खरा हदय थी, तेने उपाधि नथी, ऐवा श्री माणिभद्र देव तमने, वंदुं घणा भावथी. १
देवा सुख समस्त जनने, जे छे सदा जागता, सेवाना करनार ना पलक मां कष्टो बधा कापता;
सिद्धि सर्व मळे अने भय टळे, आपे सदा सन्मति, एवा श्री माणिभद्र देव नमतां आनंद थाय अति. २
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सरल अर्थ (arth)
पहली चार पंक्तियाँ: हे श्री मणिभद्र देव! आप सच्चे देव हो, जो सब काम सिद्ध करने की शक्ति रखते हैं। आप सारे विघ्न और बाधाएँ नष्ट करने वाले, बहुत शक्तिशाली देव हो। जो आपके चरणों की सच्चे दिल से सेवा करता है, उसे कोई कमी या अपमान नहीं रहता। ऐसे आप श्री मणिभद्र देव को मैं बहुत भाव से वंदन करता हूँ।
अगली चार पंक्तियाँ: हे देव! आप सभी जीवों को सुख देने वाले, सदा जागृत रहने वाले रक्षक देव हो। जो भी आपकी सेवा करते हैं, उनकी पलक में ही उनके सारे दुख‑कष्ट कट जाते हैं। आपकी कृपा से सारी सिद्धि (सफलता) मिलती है, डर दूर होता है और सही समझ (सन्मति) मिलती है। ऐसे श्री मणिभद्र देव को नमस्कार करने से मन में बहुत आनंद उत्पन्न होता है।
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परम्परा का भाव
- श्री मणिभद्र वीर जैन धर्म में एक यक्ष / वीर (रक्षक देव) के रूप में पूजित हैं, विशेषकर श्वेतांबर परम्परा में।
- यह स्तुति मुख्य रूप से रक्षा, विघ्न‑नाश, सही निर्णय और कार्य‑सिद्धि के लिए भावपूर्वक गाई जाती है।
- सिद्धान्त की दृष्टि से मुक्ति केवल तीर्थंकर भगवान और सिद्धों से जुड़ी है; मणिभद्र वीर जैसे यक्ष‑देव संघ और साधकों के रक्षक माने जाते हैं।
मणिभद्र वीर, उनकी पूजा और कथा के बारे में और पढ़ने के लिए आप यहाँ देख सकते हैं