Jain durlabh mantra
“दुर्लभ मंत्र” के नाम से कोई एक ही सार्वत्रिक जैन मंत्र नहीं है, पर जैन धर्म में दुर्लभ (बहुत कठिन से मिलने वाली) वस्तुओं को याद दिलाने वाले कई श्लोक हैं। सबसे प्रसिद्ध में से एक है बोधि-दुर्लभ भावना का यह श्लोक:
मूल श्लोक (Bodhi Durlabh Bhavana)
> धन-कन कंचन राज सुख, सभहि सुलभ करि जाना। > दुर्लभ है संसार में, एक जथारथ ज्ञान॥
सरल अर्थ
- धन, सोना, राज्य, भोग–सुख आदि तो संसार में बहुत लोगों को मिल जाते हैं।
- परंतु इस संसार में सही, शुद्ध, सम्यक् ज्ञान मिलना बहुत दुर्लभ है।
- यह श्लोक हमें याद दिलाता है कि
कैसे प्रयोग करें?
- रोज़ शांत मन से 5–11 बार यह श्लोक पढ़ सकते हैं।
- पढ़ते समय मन में भाव रखें:
- यह आत्म-जागृति (आत्मबोध) बढ़ाने वाला भावना श्लोक है,
यदि आप किसी और विशेष “दुर्लभ मंत्र” (जैसे मनुष्य जन्म दुर्लभ, सम्यग्दर्शन दुर्लभ आदि पर आधारित श्लोक) की तलाश में हैं, तो उसी की पंक्तियाँ लिखकर बताएँ, तब मैं उसका भी अर्थ समझा सकता हूँ।