अरिहंत में कौन सा चारित्र होता है
अरिहंत में “यथाख्यात चारित्र” होता है।
संक्षेप में समझिए:
- चारित्र = आचरण, व्यवहार, चलने की पूरी रीति
- साधारण जीव में चारित्र अपूर्ण होता है (कषाय, राग-द्वेष से मिला हुआ)
- अरिहंत ने समस्त चार कषाय (क्रोध, मान, माया, लोभ) और मोह का पूरी तरह नाश कर दिया होता है
- इसलिए उनका आचरण जैसा सच्चा स्वरूप है, वैसा ही हो जाता है – इसे ही कहते हैं
इसे ही पूर्ण, निर्मल, वीतराग चारित्र भी कहा जाता है।
सार: अरिहंत = यथाख्यात चारित्रधारी, पूर्ण वीतराग आचरण वाले भगवान।