Mangal Gaon Gruh Pravesh ka geet banae
नीचे एक सरल, सुन्दर “मंगल गृह प्रवेश” का जैन धर्मानुसार गीत दे रहा हूँ, जिसे आप कीर्तन या ग्रुप में आसानी से गा सकते हैं। (आप “मंगल गाँव” का नाम जहाँ चाहें जोड़ सकते हैं)
-------------------------------- मंगल गृह प्रवेश गीत (धुन – किसी भी सरल भजन की धुन पर)
१. मंगल गाँव में आज हमारे, शुभ घड़ी ये आई है आर्यिका–मुनि, जिनदेवों की, कृपा यहाँ बरसाई है
धर–धर द्वारे नाम पुकारें, अरिहंत-वंदन गाई है मंगल गाँव में आज हमारे, शुभ घड़ी ये आई है
संगी (कोरस): हे अरिहंत देव, हे सिद्ध सुरेश रakho sadaa hum par apni drishti vishesh हँसे धर्म की-धारा हर इक श्वास में मंगल हो गृह प्रवेश, मंगल हो गृह प्रवेश
२. सत्य-अहिंसा का दीप जलेगा, इस नव-गृह के आँगन में सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान रहे, हर पल हर इक प्राण में
क्रोध-मोह, तृष्णा सब मिट जाएँ, जपें नियम प्रति-प्राण में सत्य-अहिंसा का दीप जलेगा, इस नव-गृह के आँगन में
संगी (कोरस दोहराएँ)
३. माता–पिता, सन्तान सभी, ले व्रत छोटे–छोटे से झूठ न बोले, जीव न दुखाएँ, ध्येय रखे स्वयं मोक्ष के
पंच परमेऽष्ठी का स्मरण रहे, हर सुख–दुख की राते में माता–पिता, सन्तान सभी, ले व्रत छोटे–छोटे से
संगी (कोरस दोहराएँ)
४. (अंतिम) इस गृह से उठे पुकार सदा, “जिनशासन की जय हो” हर अतिथि को सत्कार मिले, मन निर्मल, मधुर वचन हो
मंगल गाँव का हर इक कोना, धर्म–सुगंध से महके इस गृह में बस धर्म ही फूले, कर्म-मल सब धुलते रहें
संगी (अंतिम कोरस): हे अरिहंत देव, हे सिद्ध सुरेश रakho sadaa hum par apni drishti vishesh घर-घर फैले दया, तप और संयम का सन्देश मंगल हो गृह प्रवेश, मंगल हो गृह प्रवेश
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आप चाहें तो:
- “मंगल गाँव” की जगह अपने गाँव/शहर का नाम डाल सकते हैं।
- कहीं-कहीं “अरिहंत देव” के साथ “श्री महावीर स्वामी” या अपने कुलदेव का नाम जोड़ सकते हैं।
अगर आपको छोटा, सिर्फ 2–3 अंतरे वाला संस्करण चाहिए हो तो बता दें, उसी का संक्षिप्त रूप भी बना सकता हूँ।