तीर्थंकर जन्म पर सबसे पहले किसके आसन कांपते हैं
जैन धर्म के अनुसार, जब भी किसी तीर्थंकर का जन्म होने वाला होता है, तो सबसे पहले जिनका आसन कांपता है, वे हैं:
इंद्र (देवों के राजा) का सिंहासन / आसन।
थोड़ा सरल रूप में:
- तीर्थंकर के गर्भ में आने, जन्म, दीक्षा, केवलज्ञान आदि जैसे कल्याणक होने पर
- देव लोक में इंद्र के सिंहासन में स्पन्दन (कंपन) होता है
- इससे इंद्र को संकेत मिलता है कि किसी महापुरुष / तीर्थंकर का महत्वपूर्ण कल्याणक हो रहा है
- फिर इंद्र आदि देव वहाँ आकर महाभिषेक, जन्म कल्याणक आदि मनाते हैं
श्वेतांबर और दिगंबर – दोनों परंपराओं में यह बात समान रूप से मानी जाती है कि तीर्थंकर जन्म आदि के समय सबसे पहले देवाधिदेव इंद्र का आसन हिलता है और वे ही इस शुभ घटना को पहचानते हैं।