Sadhviji upkaran with photo
साध्वीजियों के “उपकरण” से मतलब उनके साधु‑जीवन में उपयोग होने वाली आवश्यक चीज़ों से है। यहाँ मैं मुख्य उपकारणों की सरल सूची दे रहा हूँ, ताकि आप बिना फोटो भी आसानी से कल्पना कर सकें।
ध्यान रहे – श्वेताम्बर साध्वी और दिगम्बर आर्यिका के उपकरण में थोड़ा भेद होता है।
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1. श्वेताम्बर साध्वी के मुख्य उपकरण
- मुँह‑पट्टी (मुखवस्त्र / मुहपत्ती)
- सफेद पतली कपड़े की पट्टी, मुँह के आगे बाँधी जाती है। - उद्देश्य: बोलते‑साँस लेते समय सूक्ष्म जीवों की हिंसा कम हो।
- ओघो / रजोहरण
- सफेद कपड़े का छोटा झाड़न जैसा। - बैठने से पहले, स्थान को हल्के से बुहारने में उपयोग; ताकि छोटे कीट आदि हट जाएँ, उनकी हिंसा न हो।
- पुस्तकें / पोथी
- आगम, तत्त्व‑ग्रन्थ आदि, जिनसे वे स्वाध्याय (शास्त्र‑अध्ययन) करती हैं। - इन्हें हमेशा बहुत श्रद्धा से रखा जाता है।
- पिच्छी / झाड़न (कुछ परम्पराओं में)
- मुलायम कपड़े या पंख से बना छोटा झाड़न। - प्राणियों को हटाने, और स्थान स्वच्छ करने के लिए।
- कमण्डल / लोटा (जल‑पात्र)
- पीने व आवश्यक धार्मिक उपयोग हेतु छोटा पात्र। - हमेशा सीमित और संयमी उपयोग होता है।
- थैली / झोली (छोटी पोटली)
- अपने आवश्यक न्यूनतम वस्त्र, पोथी, दवा आदि रखने के लिए छोटी सी थैली।
- आसन / चादर
- बैठने‑सोने के लिए साधारण, सादा वस्त्र। - अधिक आराम की नहीं, बस आवश्यकता भर की वस्तु।
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2. दिगम्बर आर्यिका (साध्वी) के मुख्य उपकरण
- पिच्छिका (मोर‑पंख की झाड़न)
- मोरपंखों से बनी छोटी गुच्छी‑झाड़न। - आगे चलते या बैठते समय जमीन/आसन पर हल्के से फेरती हैं, ताकि छोटे जीव हट जाएँ – अहिंसा की रक्षा के लिए।
- कमण्डलु (जल‑पात्र)
- लकड़ी, नारियल या धातु का छोटा पात्र। - पीने और कुछ विशिष्ट धार्मिक क्रियाओं में उपयोग।
- शास्त्र‑पुस्तकें
- आगम‑ग्रन्थ, तत्त्व‑ग्रन्थ आदि – स्वाध्याय के लिए।
- मुँह‑पट्टी (कुछ परम्पराओं में)
- कुछ दिगम्बर आर्यिकाएँ भी मृदु मुख‑आवरण रखती हैं, ताकि सूक्ष्म जीवों की रक्षा हो।
- अन्य बहुत सीमित वस्त्र/चादर
- शरीर‑आवरण के लिए बहुत सादा, कम से कम वस्त्र, तप‑संयम की भावना के साथ।
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“फोटो” के बारे में
मैं यहाँ सीधे फोटो नहीं दिखा सकता, लेकिन आप किसी भी जैन मंदिर में
- श्वेताम्बर साध्वीजी, या
- दिगम्बर आर्यिका‑श्री
इन्हीं सीमित, सरल और अहिंसात्मक वस्तुओं के सहारे वे अत्यन्त त्याग‑पूर्ण और संयमी जीवन जीती हैं।