Kisne jeevdaya se ghandhar padh paaya
Jainism ke anusar, jeevdaya (सर्व प्राणियों पर दया, अहिंसा) सबसे महत्वपूर्ण धर्म है। Gandhar (गणधर) वे प्रमुख शिष्य थे जो भगवान महावीर के उपदेशों को समझकर, उन्हें संप्रेषित करने में सक्षम थे।
Gandhar pad (गणधर पद) तक वही व्यक्ति पहुँच सकता है, जिसने अहिंसा और जीवदया के सिद्धांतों को अपने जीवन में पूरी तरह अपनाया हो। भगवान महावीर के प्रमुख गणधर, जैसे गौतम स्वामी, जीवदया एवं अहिंसा के सर्वोच्च आचार्य माने जाते हैं।
अर्थात्—जिसने जीवदया (अहिंसा) का पालन पूर्ण रूप से किया, वही गहन धर्म (गणधर पद्धति) को समझ पाया और उसे दूसरों तक पहुँचा सका। Jain ग्रंथों के अनुसार, जीवदया ही गणधर बनने की पहली और अनिवार्य शर्त है।