Jinpuja se ghoval bana raja
आपका प्रश्न "Jinpuja se ghoval bana raja" से संबंधित है। जैन धर्म में 'जिनपूजा' अर्थात तीर्थंकर भगवान की पूजा का बहुत महत्व है। 'घोवल' एक शब्द है जो कुछ क्षेत्रीय बोलियों में उपयोग होता है, आमतौर पर यह कथा या भजन में प्रयुक्त होता है।
प्रश्न का भावार्थ यह है कि 'जिनपूजा करने से कोई राजा कैसे बन सकता है' या इससे संबंधित कोई कथा है क्या?
जैन धर्म में ऐसी कई कथाएँ हैं, जहाँ किसी व्यक्ति ने अश्रद्धा, भक्ति, एवं जिनपूजा के प्रभाव से पूर्व जन्मों के पुण्य के कारण उच्च पद, जैसे- राजा, चक्रवर्ती, या इन्द्र आदि की प्राप्ति की। उदाहरण के लिए, 'श्रावकाचार' और 'पुराणों' में उल्लेख मिलता है कि जिनपूजा, दान, एवं संयम से पुण्य संचित होते हैं, जिसके फलस्वरूप अगले जन्म में सुख, ऐश्वर्य एवं उच्च पद की प्राप्ति होती है।
विशेषकर, 'जिनपूजा' में श्रद्धा पूर्वक पूजा, अभिषेक, अर्घ्य, दीप, धूप, नैवेद्य आदि अर्पित करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और पुण्य संचित होते हैं। इन पुण्यों के फलस्वरूप आत्मा को अगले जन्म में राजा, देव, या श्रेष्ठ मनुष्य जन्म प्राप्त हो सकता है।
इसका तात्पर्य यह है कि जिनपूजा के द्वारा पुण्य संचित होते हैं, जिससे जन्म-जन्मांतरो में श्रेष्ठ स्थिति प्राप्त होती है, चाहे वह 'राजा' हो या अन्य कोई उच्च पद।
यदि आपको कोई विशेष कथा या संदर्भ चाहिए तो कृपया स्पष्ट रूप से बताएं।