Jeevdiya se gader pad papt huaa
आपका प्रश्न "जीवदिया से गदर पड़ पापत हुआ" (संभावित अर्थ: जीवदया न करने से पाप लगता है?)—जैन धर्म के अनुसार—सही है।
जैन धर्म में जीवदया (सभी जीवों पर दया) को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। अहिंसा (हिंसा न करना) जैन धर्म का मूल सिद्धांत है। अगर कोई जीवदया नहीं करता या किसी भी प्रकार से जीवों को कष्ट पहुँचाता है, तो वह पाप का बंधन करता है। तत्त्वार्थ सूत्र (जैन ग्रंथ) के अनुसार, जीवों को मारना, कष्ट पहुँचाना, बांधना, डराना, खाना आदि—ये सब पाप कर्म हैं। जीवदया करना—यानी सभी प्राणियों पर दया, करुणा और प्रेम रखना—मुक्ति (मोक्ष) के मार्ग का एक प्रमुख अंग है।
सारांश: जीवदया न करने या जीवों को कष्ट पहुँचाने से पाप बंधता है। जीवदया करना जैन धर्म का अनिवार्य कर्तव्य है।
अगर आप विस्तार से या किसी उदाहरण सहित जानना चाहें, तो कृपया बताएं।