Simandhar swami kaamangara
482
श्री सीमंधर स्वामी के बारे में संक्षेप में आसान भाषा में समझिए:
- श्री सीमंधर स्वामी जैन धर्म के वर्तमान समय के जीवित तीर्थंकर माने जाते हैं।
- वे हमारे इस पृथ्वी‑लोक (भरत क्षेत्र) में नहीं, बल्कि महाविदेह क्षेत्र नाम के विशुद्ध प्रदेश में विराजमान हैं।
- वहाँ वे केवलज्ञान प्राप्त अरिहंत रूप में धर्म‑देशना दे रहे हैं और अनगिनत जीवों को मोक्ष‑मार्ग पर लगा रहे हैं।
जैन दृष्टि से उनका महत्व
- हमारे भरत क्षेत्र में अभी (पाँचवे आर में) कोई तीर्थंकर पैदा नहीं होते,
- भाव यह रखा जाता है कि:
परंपरा में अंतर (श्वेतांबर / दिगंबर)
- श्वेतांबर परंपरा
- दिगंबर परंपरा
साधक के लिए क्या भाव रखना?
- “मैं अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, संयम और तप के मार्ग पर चलूँ,
यही श्री सीमंधर स्वामी की आराधना का मुख्य आध्यात्मिक अर्थ है – जीवित तीर्थंकर की स्मृति से अपने भीतर सम्यक दर्शन और संयम की ज्योति जलाना।