जैन दिपाली हिदी
जैन दीपावली (जैन दिवाली) को सरल हिंदी में ऐसे समझिए:
- क्या है जैन दीपावली?
जैन धर्म में दीपावली को मुख्य रूप से “भगवान महावीर निर्वाण दिवस” या “महावीर निर्वाण पर्व”, दीपालिका / दीपावली कहा जाता है। इस दिन भगवान महावीर स्वामी ने पावापुरी (बिहार) में मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त किया था।
- कब मनाई जाती है?
कार्तिक अमावस्या की रात्रि (हिंदू दिवाली वाले ही दिन) – यही दिन जैनों के लिए महावीर निर्वाण दिवस है – और यहीं से वीर निर्वाण संवत / जैन नववर्ष की शुरुआत मानी जाती है।
- जैन दीपावली का मुख्य भाव
- केवल कीर्ति‑पर्व नहीं, वैराग्य और आत्म-जागृति का पर्व - मोक्ष प्राप्त महावीर को स्मरण कर के – उनके उपदेश, संयम, अहिंसा, अपरिग्रह को जीवन में उतारने का संकल्प - दिया (दीपक) जलाना = अज्ञान का अंधेरा हटाकर सम्यक ज्ञान का प्रकाश जगाना
- कैसे मनाते हैं? (संक्षेप में)
- मंदिर में भगवान महावीर की विशेष पूजा, अभिषेक - निर्वाण लड्डू की वेदी अर्पित की जाती है - प्रायः रात्रि में उत्तरा्ध्ययन सूत्र व महावीर के अंतिम उपदेशों का पाठ - घर, दूकान, मंदिर में दीये-बत्ती, पर – पटाखों व हिंसा से बचने पर विशेष जोर - अगले दिन (प्रथमा) से जैन नववर्ष की शुरुआत; व्यापारी नई बहियाँ/लेजर शुरू करते हैं।
- दिगंबर और श्वेतांबर परंपरा
- दोनों के लिए यह दिन महावीर निर्वाण दिवस ही है। - अर्थ और महत्व एक ही है; बस पूजा‑पद्धति, व्रत/उपवास के तरीके, पाठ किए जाने वाले ग्रंथों में थोड़े भेद हो सकते हैं (जैसे कहाँ कौन‑सा सूत्र पढ़ते हैं, कितने उपवास करते हैं आदि)।
संक्षेप में: जैन दीपावली = भगवान महावीर के मोक्ष का स्मरण + ज्ञान और संयम का दीप जलाने का दिन, जहाँ बाहरी रोशनी के साथ‑साथ अंदर की आत्मा को भी प्रकाशमान करने का प्रयास किया जाता है।
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