Jinvani kya hai
“जिनवाणी” का बहुत सरल अर्थ है – जिन (तीर्थंकर / अरिहंत) की वाणी, यानी भगवान जिनेन्द्र के उपदेश।
थोड़ा विस्तार से:
- जिनवाणी क्या है?
- तीर्थंकर भगवान जब केवलज्ञान प्राप्त करके धर्म-देशना देते हैं, वही उनकी शुद्ध, सर्वज्ञ वाणी कहलाती है – इसे ही जिनवाणी या जिनवानी कहा जाता है। - यह वाणी सब जीवों के वास्तविक कल्याण (मोक्ष) के लिए होती है।
- जिनवाणी में क्या आता है?
- सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र - अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह जैसे व्रत - नव तत्व, कर्म सिद्धांत, आत्मा‑परमात्मा का स्वरूप, मोक्ष मार्ग - कुल मिलाकर, जीव को संसार से निकालकर मोक्ष तक पहुँचाने वाली सारी शिक्षाएँ।
- शास्त्र और जिनवाणी
- भगवान की वाणी को शिष्यों ने श्रुतज्ञान (आगम, सिद्धांत ग्रंथ) के रूप में ग्रहण किया। - इसलिए, आज जो हम प्रामाणिक जैन शास्त्र मानते हैं, उन्हें भी सामान्य भाषा में “जिनवाणी” कहा जाता है, क्योंकि वे जिन की ही वाणी का रूप हैं।
- दिगंबर और श्वेतांबर मत
- दोनों परंपराएँ मानती हैं कि मूल जिनवाणी – तीर्थंकर की दिव्य देशना है। - अंतर इस बात में है कि आज कौन‑कौन से आगम/ग्रंथ जिनवाणी के रूप में सुरक्षित हैं, पर जिनवाणी का मूल अर्थ दोनों में समान है।
संक्षेप में: जिनवाणी = जिन की वो पवित्र वाणी, जो जीव को सही ज्ञान देकर उसे मोक्ष के रास्ते पर चलाती है।