प्रियदर्शना जी को किसने प्रतिबोधित किया
प्रियदर्शना जी (भगवान महावीर की पुत्री और जामाली की पत्नी) को श्रावस्ती नगरी के श्रावक ‘ढंक कुम्हार’ ने प्रतिबोधित (सही मार्ग पर जागृत) किया था।
जामाली के अपूर्ण/अपूर्ण कार्य संबंधी गलत मत को मानने के कारण प्रियदर्शना जी भी भ्रान्ति में थीं। ढंक कुम्हार ने जलते वस्त्र वाले उदाहरण से उन्हें यह समझाया कि जो काम चल रहा हो उसे भी ‘किया जा रहा है’ कहा जाता है – यही अरिहंतों की वाणी है। यह सुनकर उनका मोह दूर हुआ, उन्होंने अपनी भूल स्वीकार की और पुनः भगवान महावीर के संघ में सम्मिलित हो गईं।