i am doing varshitap what are boiled water kaaal
Varshitap करते समय उकाले (उबले हुए) पानी का काल (समय-सीमा) परंपरा के अनुसार इस प्रकार माना जाता है:
1. सामान्य नियम (ज़्यादातर श्वेतांबर परंपरा)
- पानी को अच्छी तरह उबाल कर ठंडा किया जाता है (उकाला / उबाल).
- एक बार उबाला हुआ पानी सामान्यतः 24 घंटे तक पीने योग्य माना जाता है, बशर्ते:
कई जगहों पर और सख़्ती से:
- सुबह सूर्योदय के बाद उकाला बनाया हो तो उसी दिन सूर्यास्त तक उपयोग करने की प्रथा है।
- अगला दिन नया उकाला बनाया जाता है – खासकर जब व्यक्ति Varshitap, मासखमन, आदि बड़ा तप कर रहा हो।
2. दिगंबर परंपरा
- दिगंबर परंपरा में साधु–साध्वी तो सामान्यतः ताज़ा छाना/उबाला हुआ पानी, अल्प समय के भीतर ही लेते हैं।
- श्रावक–श्राविकाएँ Varshitap में सामान्यतः एक दिन का उकाला ही मानते हैं; दो दिन पुराना पानी लेना उचित नहीं माना जाता।
3. तप करते समय सावधानी
Varshitap जैसे महातप में:- जहाँ तक संभव हो रोज़ नया उकाला बनवाना उत्तम है।
- घर में या जैन संघ में जो नियम चले आते हों, वही मानना चाहिए –
अगर आप किसी विशिष्ट आचार्य–परंपरा को मानते हैं, तो उनके अनुसार:
- कुछ जगह स्पष्ट नियम:
संक्षेप में:
- साधारण रूप से 24 घंटे तक उकाला चल सकता है,
- लेकिन Varshitap में उसी दिन का उकाला, उसी दिन प्रयोग करना अधिक उत्तम और सुरक्षित माना जाता है।