kevali kya nahi dekhte
केवली (जिसे केवलज्ञान हुआ है) के संदर्भ में जैन दर्शन का सिद्धान्त यह है:
केवली क्या नहीं देखते? दर्शन के अनुसार – केवली के लिए ऐसा कुछ भी नहीं है जो “नहीं दिखाई देता”। उनका केवलज्ञान:
- सभी द्रव्यों (जीव–अजीव) और
- उनके सभी पर्यायों (अतीत, वर्तमान, भविष्य के सभी सूक्ष्म से सूक्ष्म परिवर्तन)
को एक साथ, पूर्णत: और बिना किसी भूल के जानता है। इसलिए विषय की दृष्टि से कहा जाए तो केवली से कुछ भी छिपा नहीं रहता।
हाँ, एक बात जरूर समझनी है:
- वे सब कुछ राग‑द्वेष रहित देखते हैं,
- किसी को “मेरा–तेरा”, “अपना–पराया”, “प्रिय–अप्रिय” की भावना से नहीं देखते,
- पापी–पुण्यात्मा के रूप में नफरत/लगाव से नहीं देखते,
संक्षेप में:
- वस्तु की सीमा से – केवली के लिए कुछ भी अदृश्य / अज्ञान नहीं रहता।
- भाव की सीमा से – वे अज्ञान, राग‑द्वेष, पक्षपात आदि भाव नहीं “देखते” (अनुभव नहीं करते), क्योंकि उनके भीतर ऐसे कषाय रह ही नहीं जाते।